
रामदेवरा (जैसलमेर) के ब्रीडिंग सेंटर (कैप्टिव ब्रीडिंग) के 2 गोडावण (ग्रेट इंडियन बस्टर्ड) पहली बार जंगल में छोड़े गए हैं। ब्रीडिंग सेंटर में 9.25 करोड़ की री-वाइल्डिंग टनल में 10 गोडावण को 3 महीने तक अकेले रहने और शिकार करने की ट्रेनिंग दी गई थी। अब इनमें से 2 गोडावण को अकेले सर्वाइव करने के लिए जंगल में छोड़ दिया है।

रविवार को सम क्षेत्र के डेजर्ट नेशनल पार्क की सुदासरी रेंज में इन्हें आंखों पर काली पट्टी बांधकर लाया गया था। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव और वन राज्य मंत्री संजय शर्मा की मौजूदगी में जैसे ही पट्टी हटाकर इन्हें छोड़ा गया, तो पहले ये हड़बड़ाए, फिर खुले आसमान में उड़ गए। दोनों गोडावण की उम्र करीब 7 महीने, हाइट 1 फीट और वजन लगभग 5 किलो है।

केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव की मौजूदगी में दो गोडावणों को उनके प्राकृतिक माहौल यानी जंगल में छोड़ दिया गया।
तीन महीने तक री-वाइल्डिंग टनल में कराया अभ्यास
ब्रीडिंग सेंटर में फरवरी 2026 में जंगल से गोडावण के दो अंडे लाए गए थे। इन अंडों से दोनों चूजे निकले थे। जंगल (प्राकृतिक आवास) में छोड़ने से पहले दोनों को करीब 3 महीने तक री-वाइल्डिंग टनल में रखा गया।
यहां उन्हें खुले आसमान में उड़ने, खुद भोजन तलाशने और प्राकृतिक माहौल में रहने का अभ्यास कराया गया। स्वास्थ्य और व्यवहार से जुड़ी जांच में दोनों पक्षी पूरी तरह स्वस्थ पाए गए। इसके बाद इन्हें जंगल में छोड़ने का फैसला लिया गया।

गोडावणों के लिए 9.25 करोड़ रुपए की लागत से करीब 6 महीने पहले विशेष टनल तैयार की गई थी।
GPS से होगी निगरानी
दोनों गोडावणों की सुरक्षा के लिए भी खास इंतजाम किए गए हैं। दोनों के शरीर पर GPS टैग लगाए गए हैं। इनके जरिए वैज्ञानिक उनकी लगातार निगरानी करेंगे।
इस दौरान देखा जाएगा कि गोडावण प्राकृतिक वातावरण में किस तरह उड़ रहे हैं, भोजन की तलाश कैसे कर रहे हैं, किस क्षेत्र में घूम रहे हैं और उनका सामान्य व्यवहार कैसा है।
साथ ही यह कोशिश की जाएगी कि वे बिजली की हाईटेंशन लाइन और शिकारियों के संपर्क में न आएं। वैज्ञानिक इनकी ट्रैकिंग से मिलने वाले आंकड़ों का अध्ययन करेंगे।
इससे भविष्य में ब्रीडिंग सेंटर में तैयार होने वाले दूसरे गोडावणों को भी प्राकृतिक आवास में सुरक्षित तरीके से छोड़ने की योजना बनाने में मदद मिलेगी।

दोनों ही पक्षियों के शरीर पर GPS टैग लगाए गए हैं। इसकी मदद से वैज्ञानिक 24 घंटे उनके मूवमेंट्स पर नजर रखेंगे।
2016 में शुरू हुआ था प्रोजेक्ट
भारतीय वन्यजीव संस्थान और वन विभाग करीब 10 साल से गोडावण संरक्षण के लिए वैज्ञानिक तरीके से काम कर रहे हैं। गोडावण संरक्षण के लिए साल 2016 में इंटीग्रेटेड जीआईबी कंजर्वेशन प्रोजेक्ट की नींव रखी गई थी। इसके बाद 2019 में राजस्थान में बड़े स्तर पर गोडावण ब्रीडिंग प्रोग्राम शुरू किया गया। जैसलमेर के सम में अस्थायी ब्रीडिंग सेंटर से शुरुआत हुई।
इसके बाद रामदेवरा में आधुनिक ब्रीडिंग सेंटर तैयार किया गया। मार्च 2023 में इस सेंटर में कृत्रिम रूप से पोषित यानी कैप्टिव-ब्रेड पहले चूजे का जन्म हुआ। इसके बाद साल 2025 में पक्षियों को री-वाइल्डिंग के तहत जंगल में रहने की ट्रेनिंग शुरू की गई।
अब इसी प्रक्रिया के तहत कैप्टिव ब्रीडिंग से तैयार दो गोडावणों को पहली बार प्राकृतिक आवास में छोड़ा गया है। इसे थार के दुर्लभ और संकटग्रस्त राज्य पक्षी गोडावण को बचाने की मुहिम में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।









