
नमस्कार,
जयपुर में प्रत्याशी मैडम के पोस्टर हटे तो विधायकजी पर साजिश के आरोप लगा डाले। सड़क पर लेटकर प्रदर्शन कर दिया। उधर पहले फेज की वोटिंग खत्म होते ही बाड़ेबंदी की खींचतान शुरू हो गई। टोंक में प्रत्याशी ने चुनाव भी गोरिल्ला युद्ध की तरह लड़ा और नेताओं पर चढ़ा 1980 के AI फोटो का खुमार।
राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में…
1. सड़क पर लेट गई BJP प्रत्याशी

चुनावी भाषा बड़ी मीठी होती है। इसमें सुंदर शब्दों का इस्तेमाल किया जाता है। सुनहरे वादे किए जाते हैं। एकता भाईचारे को जिंदाबाद करने की पुरजोर कोशिश की जाती है।
इसी चुनावी भाषा का इस्तेमाल करते हुए जयपुर के वार्ड 107 से बीजेपी की प्रत्याशी अनुराधा माहेश्वरी जी ने मंच से बाहुबली जैसा चुनावी डायलॉग बोला- क्या है जाति? क्या है धर्म? हम इतने कट्टर क्यों हैं? हम क्यों हिंदू-मुसलमान करते हैं? इंसान की कोई जाति नहीं, कोई धर्म नहीं। इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म।
शाम होते-होते मैडम को पता चला कि वार्ड से निगम ने उनके पोस्टर-बैनर हटा दिए। इस पर मैडम चुनावी भाषा भूल गई और अपने पर आ गईं। चांदपोल में गाड़ी की छत पर ही धरने पर बैठ गईं।
किशनपोल विधायक अमीन कागजी पर आरोप लगाने लगीं। बोलीं- मेरे पोस्टर-बैनर हटाने की साजिश अमीन कागजी की है। परकोटे को बचा लो वरना हम मर जाएंगे।
इसके बाद मैडम ने जमीनी आंदोलन शुरू किया। वे बीजेपी का झंडा लेकर सड़क पर लेट गईं। बोलीं कि साजिश में नगर निगम भी शामिल है। एक कार्यकर्ता जोश में बोला- हमारी सरकार और हमीं से बदमाशी?
उधर अमीन कागजी भी कम नहीं। अपने दो प्रत्याशियों के समर्थन में नुक्कड़ सभा में विधायक बाबा बालमुकुंदाचार्य पर जमकर तीर छोड़े। वार्ड के लोगों से बोले- सोच लो, बंटोगे तो कटोगे, कटोगे तो बंटोगे।

जयपुर के वार्ड 107 से भाजपा प्रत्याशी अनुराधा माहेश्वरी ने पोस्टर हटाए जाने के बाद सड़क पर लेटकर प्रदर्शन किया।
2. चुनाव हो गया, अब चलो बाड़े में
बाड़े में भेड़-बकरियों को बंद किया जाता है। लेकिन जहां खरीद-फरोख्त या चोरी-चकारी का डर हो, वहां नेतागण को भी बाड़े में बंद करना पड़ता है।
इधर कलयुग में जब से नेताओं की खरीद-बिक्री का चलन जोर पकड़ने लगा तो बाड़ेबंदी इजाद की गई। इसमें वोट पड़ते ही पार्टियां अपने प्रत्याशियों को घर से उठाकर बस में बैठा देती हैं।
फिर बिना दूल्हे की यह बारात किसी होटल या दूरस्थ टूरिस्ट स्थल पहुंच जाती है। जब तक बोर्ड बनने की स्थिति न आए तब तक ये बाराती मौज करते हैं।
इस दौरान इनके पास दूसरों से संपर्क करने के लिए फोन भी नहीं दिया जाता। आजकल फोन से ऑनलाइन शॉपिंग भी होती है। इसलिए फोन इस बारात में बैन होता है।
राजस्थान में पहले फेज के मतदान के खत्म होते ही बाड़ेबंदी के इंताजामात में पार्टियां बिजी हो गईं। बांसवाड़ा और अलवर से प्रत्याशियों को अज्ञात स्थान पर ले जाया गया।
चित्तौड़गढ़ में महिला प्रत्याशियों को अपने परिवार के सदस्य साथ लाने की छूट दी गई। बस में बैठाकर प्रत्याशियों की गिनती की गई। तसल्ली होने पर बस खिसकी।
अधिकतर जगहों पर बाड़ेबंदी प्रेमपूर्वक हुई। कहीं-कहीं प्रत्याशी की चोरी की कोशिश भी हुई। बाड़मेर में प्रत्याशी पारसमल चैन से घर में बैठे थे। अचानक एक कार आई और प्रत्याशी को उठाकर कार में डाल दिया गया।
इस बीच समर्थकों ने पुलिस को फोन कर दिया। पुलिस ने पारसमल को बचाया और गाड़ी में बैठाकर थाने लाने लगी। लोगों को लगा कि कहीं पुलिस भी प्रत्याशी को थाने की जगह किसी बाड़े में न जाए।
ऐसे में पुलिस से धक्का-मुक्की हो गई। लोग स्टीयरिंग पर लटक गए। बड़ी मुश्किल से ASI साहब ने मोर्चा संभाला और प्रत्याशी को कुशलता पूर्वक वहां से निकाल लाए। चर्चा है कि बाड़मेर में कांग्रेस के दो गुट बने हुए हैं। ऐसे में प्रत्याशियों को अपने गुट में लाने के लिए खींचतान की संभावना है।

चित्तौड़गढ़ के बेगूं में प्रत्याशियों को बस में बैठाकर गिनती की गई। बाड़मेर में कांग्रेस प्रत्याशी के किडनैप की कोशिश हो गई। पुलिस थाने ले जाने लगी तो लोगों ने धक्का-मुक्की कर दी।
3. चुनावी जंग की ‘गोरिल्ला तकनीक’
जंग में सब जायज है। यह जंग को लेकर पुरानी कहावत है। शिवाजी महाराज ने मुगलों को गोरिल्ला युद्ध में नाकों चने चबवा दिए थे।
इधर टोंक में एक गोरिल्ला खूब घूम रहा है। गोरिल्ला का नाम हेमंत कुमार है। चुनावी जंग में हेमंत कुमार की काफी डिमांड है।
टोंक-देवली सब जगह घूम रहे हैं। चुनाव में खड़े प्रत्याशी हेमंत कुमार को गोरिल्ला की ड्रेस में बुलाते हैं। हेमंत तीन घंटे का चार हजार चार्ज करते हैं।
चुनाव में गोरिल्ला तक बेरोजगार नहीं रहता। इलाके के भाजपा-कांग्रेस प्रत्याशियों ने गोरिल्ला का खूब इस्तेमाल किया। गोरिल्ला तैयार होकर वार्ड में पहुंचा और प्रत्याशी के साथ-साथ घूमा।
वोट की अपील के बाद दलेर मेहंदी का गाना बजता- तुणु..तुणु। गाने की धुन पर गोरिल्ला जमकर नाचता। भीड़ जुटती। लोग घरों से बाहर आते और प्रत्याशी वोट की अपील करने लगता।
गोरिल्ला का क्रेज इतना कि कई जगह तो प्रत्याशी को जाने की जरूरत नहीं। गोरिल्ला की पीठ पर पोस्टर चिपकाया और आगे का काम गोरिल्ला अकेले कर देगा।
ऐसी ही एक कोशिश अजमेर में भी की गई। दो कलाकार गोरिल्ला और भालू बनकर वार्ड में पहुंच गए। प्रत्याशी के लिए प्रचार करने लगे।
एक वोटर ने उनका वीडियो बनाया और टांग खिंचाई कर डाली। बोला- इलाके में काम कराया होता तो इंसानों से प्रचार कराते। बंदर-भालू की जरूरत नहीं पड़ती।

टोंक में कलाकार हेमंत कुमार गोरिल्ला की ड्रेस में प्रत्याशी का प्रचार करते हुए।
4. चलते-चलते..
वक्त के साथ फैशन बदलता है। लेकिन वक्त की खूबी है कि यह लौटता है। 1980 के दौर की तस्वीरों का ट्रेंड सोशल मीडिया पर बाढ़ की तरह बह रहा है।
हर कोई अपनी फोटो को AI के जरिए अस्सी के दशक की तस्वीर में बदल रहा है। उस वक्त का हेयर स्टाइल, ड्रेसिंग सेंस, बैकग्राउंड और फोटो की क्वालिटी सब कुछ एआई चंद सेकेंड में बदलकर दे देता है।
बहती गंगा में हर कोई हाथ धोने को बेताब है। राजस्थान के दिग्गज नेताओं पर भी यह खुमार छाया। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से लेकर युवा नेता नरेश मीणा तक अपना अस्सी वाला अवतार शेयर कर चुके हैं।
इस फेहरिस्त में डिप्टी सीएम दीया कुमारी और प्रेमचंद बैरवा, नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल, राज्यसभा सांसद सतीश पूनिया, शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी, खेल मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ शामिल हैं।
ट्रेंड का असर हवामहल से भाजपा विधायक बाबा बालमुकुंदाचार्य पर भी हुआ। उन्होंने एक फोटो शेयर की, जिसमें बाबा को पहचानना मुश्किल हो गया। फिलहाल अस्सी के दौर वाली फोटो शेयर कर नेतागण खूब वाहवाही बटोर रहे हैं। तस्वीरें देखिए-

1980 के दशक की तस्वीरों का ट्रेंड सोशल मीडिया पर खूब चल रहा है। राजस्थान के दिग्गज नेता भी अपनी AI फोटो शेयर कर रहे हैं। सफेद चादर लपेटकर बैठे विधायक बालमुकुंदाचार्य को पहनानना मुश्किल।





