धनंजय सिंह बोले-बेनीवाल ने झोली फैलाकर मांगी थी मदद:फिर विधानसभा चुनाव में हराने की कोशिश की; RCA इलेक्शन में मैंने बगावत नहीं की

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राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (RCA) चुनाव के बाद सियासी घमासान तेज हो गया है। RCA अध्यक्ष पद के प्रत्याशी रहे धनंजय सिंह खींवसर ने भास्कर से बातचीत में सांसद हनुमान बेनीवाल पर तीखा हमला बोला है। खींवसर ने कहा- लोकसभा चुनाव के दौरान बेनीवाल ने मुझसे और मेरे पिता से मदद मांगी थी, लेकिन बाद में विधानसभा चुनाव में उन्हें ही हराने की कोशिश की।

धनंजय सिंह ने बेनीवाल को सकारात्मक और विकास की राजनीति करने की नसीहत भी दी। वहीं, RCA चुनाव में बगावत के आरोपों को खारिज करते हुए कहा- यह स्वतंत्र संघ का चुनाव था और किसी ने उन्हें चुनाव लड़ने से नहीं रोका। आगे पढ़ें पूरा इंटरव्यू…

सवाल : RCA चुनाव को लेकर आखिर इतना विवाद क्यों हो गया है?

जवाब : किसी तरह की विवाद की स्थिति नहीं है। यह मीडिया द्वारा ही फैलाया जा रहा है, हकीकत इससे अलग है। वैसे भी राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन खेल नीति और लोढ़ा कमेटी के अनुसार एक स्वतंत्र संघ है। यहां कभी भी किसी पार्टी के सिंबल पर चुनाव नहीं होता है। हर व्यक्ति यहां चुनाव लड़ने का अधिकार रखता है।

सवाल : सरकार का समर्थित पैनल चुनावी मैदान में था और आपने बागी होकर चुनाव लड़ा?

जवाब : जब राजस्थान में कांग्रेस का शासन था, मैं तब विपरीत परिस्थितियों में RCA से जुड़ा था। 2021-22 में मैं नागौर जिला क्रिकेट संघ का अध्यक्ष बना था। विपरीत परिस्थितियों में हमने कांग्रेस सरकार के खिलाफ लड़ाई लड़ी।

पूर्व मुख्यमंत्री के पुत्र वैभव गहलोत को RCA अध्यक्ष पद से हटाने में हमारी टीम का अहम योगदान रहा। इसके बाद मुझे RCA का कार्यवाहक अध्यक्ष बनाया गया। लगातार 10 एडहॉक कमेटी में मुझे काम करने का मौका दिया गया।

धनंजय सिंह ने कहा- मैं बागी नहीं हूं, मेरे लिए संगठन से बढ़कर कुछ भी नहीं है। भाजपा तो मेरी मां है।

धनंजय सिंह ने कहा- मैं बागी नहीं हूं, मेरे लिए संगठन से बढ़कर कुछ भी नहीं है। भाजपा तो मेरी मां है।

मेरा ऐसा मानना था कि RCA स्वतंत्र संघ है, जहां कोई भी चुनाव लड़ सकता है। इसमें बीजेपी वर्सेस बीजेपी जैसी कोई बात नहीं थी। मुझे और मेरे दो सहयोगी मोहित यादव और आशीष तिवाड़ी किसी को भी चुनाव लड़ने से न रोका गया और न ही नाम वापस लेने के लिए कहा गया।

जो लोग हमारे साथ चुनाव लड़ रहे थे, वह लोग भी भाजपा के हमारे साथी थे। तो हमें ऐसा लगा सरकार ने यह सोचा होगा, जो जीतेगा वह सिकंदर बन जाएगा। इसलिए हमने RCA का चुनाव लड़ा था।

सवाल : तो फिर आपको भाजपा का बागी कौन बता रहा है, आपको काफी ट्रोल किया जा रहा है?

जवाब : यह सिर्फ विपक्ष के लोगों का प्रोपेगैंडा है, हकीकत में ऐसा कुछ भी नहीं है। यह पूरी तरह से झूठ है, जब मैंने खुद इस बात को सुना तो मेरे दिल में काफी दर्द हुआ। मैं, मोहित यादव और आशीष तिवाड़ी तीनों पिछले कई साल से भाजपा के लिए काम कर रहे हैं। हम तीनों बीजेपी के कर्मठ कार्यकर्ता हैं।

मैं 2011 से भाजपा का कर्मठ कार्यकर्ता हूं। मोहित यादव भाजपा के चुनाव चिह्न पर विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं। आशीष तिवाड़ी 2008 से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े हुए हैं। मेरे तो ऑफिस का नाम भी पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर है। मैं तो यह पूछना चाहता हूं कि हमसे ज्यादा भाजपाई कौन है।

धनंजय सिंह ने कहा कि आरसीए चुनाव में पार्टी ने हमें चुनाव लड़ने से रोका नहीं था, इसलिए हम चुनावी मैदान में थे।

धनंजय सिंह ने कहा कि आरसीए चुनाव में पार्टी ने हमें चुनाव लड़ने से रोका नहीं था, इसलिए हम चुनावी मैदान में थे।

पिछले दिनों भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने भी कहा था RCA एक स्वतंत्र संघ है, उसमें बीजेपी संगठन का कोई लेना-देना नहीं है। मेरे तो शरीर में भी भाजपा का ही खून बहता है। मेरे लिए संगठन से बढ़कर कुछ भी नहीं है। भाजपा तो मेरी मां है।

अगर चुनाव लड़ने से हमें रोका गया होता तो हम काफी पहले ही पीछे हट जाते। न तो मुख्यमंत्री जी के यहां से और न ही किसी अन्य स्तर पर किसी ने हमें चुनाव में पीछे हटने को कहा। हमारा कहीं भी ऐसा कोई उद्देश्य भी नहीं था कि भाजपा के खिलाफ भाजपा के लोग ही चुनावी मैदान में आएं। यह सिर्फ मीडिया द्वारा बनाया गया परसेप्शन है। यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि हमें पार्टी का बागी और पार्टी के खिलाफ बताया जा रहा है।

धनंजय स्कूल टाइम से क्रिकेट खेलते आए हैं, वह अपनी टीम के बेहतरीन खिलाड़ियों में से एक रहे हैं।

धनंजय स्कूल टाइम से क्रिकेट खेलते आए हैं, वह अपनी टीम के बेहतरीन खिलाड़ियों में से एक रहे हैं।

सवाल : राजस्थान क्रिकेट में पिछले कुछ वक्त से नेता पुत्रों का बोलबाला रहा, बतौर नेता पुत्र आप इस पर क्या सोचते हैं?

जवाब : परिवारवाद का आरोप लगाना पूरी तरह गलत है। हम सब इंसान हैं। सब मेहनत करते हैं। मैं 16 साल से राजनीति में सक्रिय हूं, लेकिन कभी मौका नहीं दिया गया। हमेशा यही कहा गया कि आप नेता पुत्र हैं। आप मंत्री पुत्र हैं। मैंने इस बात का सम्मान भी किया।

जब मुझे मुख्यधारा की राजनीति में मौका नहीं मिला। तो हम सब खेल प्रेमी हैं, ऐसे में हमने क्रिकेट के जरिए राष्ट्र सेवा करने का फैसला किया। मैं खुद स्कूल टाइम से क्रिकेट खेलता आ रहा हूं। इसलिए खिलाड़ियों की जरूरत और खेल को आगे कैसे बढ़ाना है, इसका अनुभव रखता हूं।

महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश समेत देश के कई राज्यों में वैसे भी कई नेता पुत्र ही क्रिकेट की बागडोर संभाल रहे हैं। लेकिन वहां उन्हें नेता पुत्र का टैग देकर नजरअंदाज नहीं किया जाता है। राजस्थान में भी ऐसा ही होना चाहिए था।

सवाल : पराक्रम राठौड़ ने आप पर लंबे वक्त से चुनाव नहीं कराने का आरोप लगाया, इसे किस तरह देखते हैं?

जवाब : पराक्रम मेरे बहुत अजीज हैं। उनके और मेरे परिवार के निजी संबंध हैं। वह साढ़े तीन साल आखिर मुझे क्यों नहीं मिले, यह बात तो मेरे भी समझ में नहीं आ रही है। बल्कि वह मेरे बड़े भाई हैं, पहले भी थे और आगे भी रहेंगे।

सवाल : नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने काफी गंभीर आरोप लगाए हैं, उन्होंने कहा- आप RCA में भी भ्रष्टाचार करने के लिए ही आना चाहते थे?

जवाब : उन्होंने मेरे संस्कार को लेकर सवाल खड़े किए थे। मैं उनसे यही कहना चाहता हूं कि उनके संस्कार के बारे में राजस्थान की जनता अच्छे तरीके से जानती है। उन्होंने मुझे राजा और मेरे पिता को महाराज बताकर भी काफी आरोप लगाए। मैं यह बताना चाहता हूं कि राजतंत्र खत्म हो गया है। देश में लोकतांत्रिक प्रक्रिया है। हां, यह बात अलग है कि हमारी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से लेकर प्रदेश में हमारी पार्टी नेता जनता के दिलों के राजा हैं।

वैसे भी मेरे परिवार ने तो राजतंत्र हो या लोकतंत्र, आम जनता को हमेशा दिया ही दिया है। मैं हनुमान बेनीवाल से यह पूछना चाहता हूं बिना किसी व्यापार और बिना किसी कामकाज के आखिर वह हेलिकॉप्टर में कैसे घूमते हैं। उनकी पार्टी की कितनी रैलियां होती हैं। उन्हें फंडिंग कौन करता है?

लोकसभा चुनाव के वक्त भाजपा का जब राजस्थान में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) से गठबंधन हुआ था। तब हनुमान बेनीवाल मेरे पिता और मेरे सामने झोली फैलाकर आए थे। उन्होंने हमसे कहा था कि मैं चुनाव हार रहा हूं, मेरी मदद कीजिए। राष्ट्रीय हित में सारे गिले-शिकवे भूलकर हमने हनुमान बेनीवाल की मदद की थी। इसके बदले में हनुमान बेनीवाल ने हमें विधानसभा चुनाव में हराने की पूरी कोशिश की।

मैंने तभी हनुमान बेनीवाल को सबक सिखाने का फैसला किया था। खींवसर उपचुनाव में हमने ऐसा करके भी दिखाया। जहां बीजेपी का झंडा पकड़ने के लिए कोई तैयार नहीं था। वहां हमारी टीम गांव-गांव, ढाणी-ढाणी घूमकर पार्टी को मजबूत स्थिति में लेकर आई। जहां पार्टी दूसरे और तीसरे नंबर पर आती थी। वहां इस बार 14 हजार वोट से हमारी पार्टी की उम्मीदवार को जीत मिली।

वह मेरे परिवार में क्लेश की बात कहते हैं। जबकि नागौर का बच्चा-बच्चा जानता है कि भाई-भाई में किस तरह का क्लेश है। जिस तरह वह हमारे प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के लिए गलत बयानबाजी करते हैं। मेरे संस्कार ऐसे नहीं कि मैं उनके खिलाफ इस तरह की बात कहूं।

मैं उनसे भी सकारात्मक और विकास की राजनीति करने की अपील करता हूं। वैसे भी आरएलपी को राजस्थान की जनता शून्य पर लेकर आ गई है। अगर हनुमान बेनीवाल इसी तरह की हरकतें करते रहे तो भविष्य में राजस्थान से RLP का नाम और निशान मिट जाएगा।

सवाल : कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने RCA चुनाव में सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग का आरोप लगाया है?

जवाब : भाजपा एक बहुत बड़ा परिवार है, राजस्थान में मुख्यमंत्री भजनलालजी शर्मा हमारे परिवार के मुखिया हैं। मेरा ऐसा मानना है कि यह हमारा पारिवारिक मामला है। लेकिन कांग्रेस के कुछ लोग इसे पूरी तरह राजनीतिक रूप देना चाहते हैं।

RCA में तो कांग्रेस के खिलाफ कांग्रेस के लोग ही चुनाव लड़ चुके हैं, तब गोविंद सिंह डोटासरा कहां गए थे। कांग्रेस शासन में तो तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर डूडी (दिवंगत) को RCA में घुसने तक नहीं दिया गया था। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पुत्र वैभव गहलोत दो बार RCA अध्यक्ष रहे। लेकिन यह हमारे लिए एक बड़े दुर्भाग्य की बात है कि आज तक RCA का एक भी वर्ल्ड क्लास क्रिकेट ग्राउंड नहीं है।

सवाई मानसिंह स्टेडियम की हालत पूरी तरह बिगड़ चुकी है। जोधपुर का बरकतुल्लाह खान स्टेडियम जर्जर स्थिति में पहुंच चुका है। उदयपुर में एसोसिएशन के पास लैंड बैंक है। लेकिन वहां पर इंफ्रास्ट्रक्चर तक डेवलप नहीं किया गया है। कांग्रेस के राज में तो रवि बिश्नोई जैसे कई अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी राजस्थान छोड़कर दूसरे राज्यों में चले गए थे। तब डोटासरा कहां थे।

सवाल : आपने खेलों के लिए खींवसर फाउंडेशन बना रखा है, क्या काम होता है?

जवाब : हमारे फाउंडेशन के तहत हम पूरे मारवाड़ में लगातार काम कर रहे हैं। एक कैंपेन ‘खेलो मारवाड़’ चला रखा है। जिसके तहत अब तक हम 7200 से ज्यादा युवा खिलाड़ियों को क्रिकेट किट बांट चुके हैं।

धनंजय सिंह खींवसर 4 साल पहले ही नागौर जिला क्रिकेट संघ के अध्यक्ष चुने गए थे।

धनंजय सिंह खींवसर 4 साल पहले ही नागौर जिला क्रिकेट संघ के अध्यक्ष चुने गए थे।

सवाल : RCA अध्यक्ष पद का चुनाव जीतते हैं तो क्या प्राथमिकता रहेगी?

जवाब : मेरा मानना है कि राजस्थान में क्लब क्रिकेट कल्चर को बढ़ावा मिलना चाहिए। जोधपुर जितनी आबादी वाले देश ICC के हर टूर्नामेंट में बेहतरीन परफॉर्म करते हैं। अगर हम भी भारत और राजस्थान में क्लब क्रिकेट कल्चर को आगे लेकर आएंगे तो हमारे देश में हर गली-मोहल्ले में सचिन तेंदुलकर और जहीर खान जैसे खिलाड़ी निकलकर सामने आएंगे।

मैं चाहता हूं कि राजस्थान में फ्री और फेयर सिलेक्शन नीति बने। ताकि जो खिलाड़ी बेहतर परफॉर्मेंस दे रहे हैं उन्हें एक मौका मिल सके। साथ ही में राजस्थान में स्पोट्‌र्स इंफ्रास्ट्रक्चर को विकसित करना चाहता हूं।

अब तक देखते आया हूं कि RCA का अध्यक्ष बनते ही लोग खिलाड़ियों और आम जनता से दूर हो जाते थे। लेकिन अगर मैं अध्यक्ष बना तो खिलाड़ियों से लगातार संवाद कर उनकी समस्याओं के समाधान पर काम करूंगा। लंबे समय तक एडहॉक कमेटी का सदस्य रहते हुए मैंने खिलाड़ियों और क्रिकेट की समस्याओं को करीब से जाना है।

मेरा मानना है कि हार जीत एक सिक्के के दो पहलू की तरह होते हैं। लेकिन अगर मुझे मौका दिया गया। तो यह RCA का नया सूर्योदय होगा।

सवाल : RCA चुनाव परिणाम को लेकर विवाद अब कोर्ट में पहुंच गया है, अब आगे क्या रणनीति रहेगी?

जवाब : मैं चाहता था कि RCA का जल्द से जल्द चुनाव परिणाम जारी हो। ताकि प्रदेश के खिलाड़ियों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। मेरा मानना है मुझे या फिर किसी और व्यक्ति जिसे भी मौका मिले। उसे राजस्थान क्रिकेट के लिए बेहतर से बेहतर काम करना चाहिए। यही मेरी सोच है और भविष्य की प्लानिंग भी।

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