
दूनी तहसील क्षेत्र में अरावली पर्वतमाला की पहाड़ियों पर स्थित प्राचीन धुंधलेश्वर महादेव मंदिर के लिए आयोजित 11वीं विशाल कांवड़ यात्रा बुधवार को भव्य धार्मिक वातावरण के बीच सफलतापूर्वक संपन्न हुई। करीब 21 किलोमीटर लंबी इस पदयात्रा में हजारों श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। यात्रा के समापन पर धुंधलेश्वर महादेव परिसर में विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में भक्तों ने प्रसादी ग्रहण की।
नीलकंठ महादेव इन्दोदा बावड़ी से शुरू हुई यात्रा
कांवड़ यात्रा की शुरुआत सुबह नीलकंठ महादेव इन्दोदा बावड़ी से हुई। यात्रा निर्धारित मार्ग से होते हुए विभिन्न गांवों से गुजरी। मार्ग में ग्रामीणों और धर्मप्रेमियों ने श्रद्धालुओं का जोरदार स्वागत किया। जगह-जगह भक्तों पर पुष्पवर्षा की गई तथा यात्रा में शामिल लोगों के लिए चाय, नाश्ता, केले और ठंडे पानी की व्यवस्था की गई।
घाड़ के मुख्य बाजार में उमड़ा भक्तों का सैलाब
दोपहर करीब 3 बजे जब कांवड़ यात्रा घाड़ कस्बे के मुख्य बाजार से गुजरी, तो हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। करीब दो घंटे तक मुख्य बाजार में भक्तों का हुजूम बना रहा। धार्मिक जयघोष और श्रद्धालुओं के उत्साह से पूरा क्षेत्र भक्तिमय नजर आया।
पुलिस ने संभाली सुरक्षा व्यवस्था
विशाल भीड़ को देखते हुए यात्रा के दौरान कानून-व्यवस्था और यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस की ओर से पुख्ता इंतजाम किए गए। घाड़ थाना प्रभारी हरीराम वर्मा के निर्देशन में थाना स्टाफ और विशेष पुलिस बल पूरे यात्रा मार्ग पर तैनात रहा। पुलिसकर्मियों ने भीड़ को नियंत्रित करने और यात्रा को व्यवस्थित रूप से संपन्न कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
धुंधलेश्वर महादेव परिसर में हुआ विशाल भंडारा
यात्रा के समापन अवसर पर धुंधलेश्वर महादेव मंदिर परिसर में विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। पंगत प्रसादी में हजारों की संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने महाप्रसादी ग्रहण की। सफल आयोजन के बाद पूरे दूनी तहसील क्षेत्र में धार्मिक और भक्तिमय माहौल बना रहा।
कई गांवों की रही प्रमुख भागीदारी
कांवड़ यात्रा में कलन्दरपुरा, इन्दोदा, घाड़, कंवरपुरा, गेरोटी, बेहलडी, हाडोती, इकबाल गंज, धुवां कला, धुवां खुर्द, दौलतपुरा, डाटुन्दा, चारनेंट, कोटडा और केदारा सहित कई गांवों के श्रद्धालुओं और ग्रामीणों की प्रमुख भागीदारी रही। सामूहिक सहभागिता और श्रद्धालुओं के उत्साह ने 11वीं कांवड़ यात्रा को यादगार बना दिया।






