
बुलंदशहर के सतोहा गांव की हेमलता देवी ने कभी स्वयं सहायता समूह से जुड़कर अपने सफर की शुरुआत की थी। आज वही हेमलता खेतों में ड्रोन उड़ाकर किसानों की मदद कर रही हैं। SHG से बीसी सखी और फिर ‘ड्रोन दीदी’ तक का उनका सफर ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता और तकनीक की मिसाल बन गया है।


खेतों में अब हाथ नहीं, ड्रोन से होता है छिड़काव
सरकार से मिले ड्रोन के जरिए हेमलता किसानों के खेतों में फसलों पर कीटनाशक दवाओं का छिड़काव करती हैं। उनका कहना है कि ड्रोन से छिड़काव करने में समय की बचत होती है और करीब 60% तक दवा की बचत भी हो सकती है। ड्रोन से दवा का छिड़काव पौधों के पत्तों तक सीधे और समान रूप से पहुंचाने में मदद करता है। इससे किसानों की लागत कम करने और फसल पर बेहतर असर पाने में मदद मिलती है।
किसानों की सेहत के लिए भी सुरक्षित तरीका
पहले खेतों में कीटनाशक का छिड़काव किसानों को खुद करना पड़ता था। इस दौरान दवा के संपर्क में आने और उसके सांस के जरिए शरीर में जाने का खतरा रहता था। अब हेमलता ड्रोन के जरिए खेत से दूरी बनाकर छिड़काव करती हैं। इससे किसानों का सीधे कीटनाशक के संपर्क में आने का जोखिम कम होता है। यही वजह है कि गांव के किसान उन्हें अब सिर्फ ड्रोन चलाने वाली महिला नहीं, बल्कि अपनी खेती की मददगार ‘ड्रोन दीदी’ के तौर पर देखते हैं।

SHG से शुरू हुआ सफर, बनीं बीसी सखी
हेमलता की कहानी सिर्फ ड्रोन तक सीमित नहीं है। उन्होंने पहले स्वयं सहायता समूह से जुड़कर ग्रामीण महिलाओं के बीच काम करना शुरू किया। इसके बाद वह बीसी सखी बनीं और महिलाओं को बैंकिंग सेवाओं से जोड़ने में भूमिका निभाई। इसी सफर में उन्हें तकनीक और खेती से जुड़ने का अवसर मिला। ड्रोन ने उनके काम को नई दिशा दी और उनकी पहचान गांव से निकलकर जिले और प्रदेश तक पहुंच गई।
PM मोदी से लेकर मंत्रियों तक ने सराहा
हेमलता की मेहनत और काम को कई बड़े मंचों पर पहचान मिली है। वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और विभिन्न राज्यों के मंत्रियों से सम्मानित हो चुकी हैं। उन्हें अमेरिका के प्रतिनिधियों से मिलने का मौका मिला। इसके अलावा डीडी नेशनल पर इंटरव्यू और मुंबई समेत कई बड़े मंचों पर जाने का अवसर भी मिला। इन उपलब्धियों ने हेमलता के आत्मविश्वास को और मजबूत किया है। उनका कहना है कि सरकार से मिले ड्रोन ने उन्हें आमदनी के साथ-साथ समाज में एक नई पहचान भी दी।
‘हर महिला आगे आए और आत्मनिर्भर बने’
हेमलता का संदेश साफ है—महिलाएं सिर्फ अपने घर तक सीमित न रहें, बल्कि अपनी क्षमता और हुनर को पहचानकर आगे बढ़ें। उनका मानना है कि तकनीक और सरकारी योजनाओं का सही इस्तेमाल ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भर बनने का रास्ता खोल सकता है। उनकी कहानी बताती है कि गांव की महिला जब अवसर और तकनीक को अपने हाथ में लेती है, तो वह सिर्फ अपनी जिंदगी नहीं बदलती, बल्कि अपने आसपास के लोगों के लिए भी बदलाव की वजह बन सकती है।
तेजस्विनी – नारी से नया UP
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