
डोटासरा जी को अब तक कुछ लोग मुख्यमंत्री की रेस में मानकर चल रहे थे, उन्होंने अपना सपना जाहिर कर दिया। कॉकारोचों ने आपस में हाल-चाल पूछा और बूंदी के केशोरायपाटन में युवक को सिस्टम बदलना है।
राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में…
1. डोटासरा जी का सपना ‘सबसे बड़ा ताज’
मानेसर कांड के बाद डोटासरा जी को कांग्रेस संगठन की जिम्मेदारी मिली थी। उन्होंने तत्कालीन सीएम अशोक गहलोत के पैर छूकर यह जिम्मेदारी संभाली।
धीरे-धीरे राजस्थान की राजनीति में गोविंद सिंह डोटासरा ने अपना वह मुकाम बना लिया कि उनके नाम की चर्चा सीएम की रेस में होने लगी।
आदिवासी नेता महेंद्रजीत मालवीय के समर्थकों ने जब पूर्व सीएम को लेकर नारेबाजी की थी, तब संगठन के मुखिया ने तल्ख लहजे में कह दिया था कि नारे किसी व्यक्ति के नहीं लगेंगे।
हालात ये हो गए कि जहां कांग्रेस में सीएम की रेस में दो चेहरे थे, वे अब चार हो गए। गहलोत, पायलट, डोटासरा के बाद जूली जी भी रेस में शामिल कर दिए गए।
अजमेर में जाट समाज के प्रतिभा सम्मान समारोह में डोटासरा जी ने मजाक-मजाक में बड़ी बात कह दी।
लीलण डांस के लिए विख्यात लोक कलाकार बनवारी लाल जाट का नाम सम्मान के लिए पुकारा गया। वे मंच पर आए। मंच पर डोटासरा जी के साथ मंत्री भागीरथ चौधरी भी मौजूद थे।
संचालक ने सिफारिश की- बनवारी लाल जी 40 साल से लीलण डांस कर रहे हैं, इन्हें पद्मश्री सम्मान के लिए दोनों दल प्रयास करें। इस पर डोटासरा ने चुटकी ले ली।
कलाकार से बोले- आप मुझे प्रधानमंत्री बनवा दो, मैं आपको पद्मश्री कल ही दिला दूंगा। कलाकार ने भी वैसा ही जवाब दिया- मेरे लिए तो इस वक्त भी आप प्रधानमंत्री ही हो।

लीलण डांस के लिए विख्यात कलाकार बनवारी लाल का सम्मान करते पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा।
2. कॉकरोचों की बातचीत
कॉकरोचों की जिंदगी ‘हिट’ पर खत्म हो जाती है। लेकिन ये वो वाले कॉकरोच नहीं। जितना पिट रहे हैं, उतने ही हिट हो रहे हैं।
दिल्ली की जंतर-मंतर पर जब कॉकरोचों का आंदोलन चल रहा था तो समर्थन लेने CJP के फाउंडर अभिजीत दीपके जयपुर आए थे। यहां उन्हें कंधों पर उठा लिया गया।
लेकिन भीड़ में शामिल कुछ लोगों ने उनका गमछा खींचकर दो-चार थप्पड़ रसीद कर दिए थे। इस बार मामला सरकारी स्कूल का था।
तबेले में चल रही स्कूल का मुद्दा उठाने CJP प्रवक्ता आशुतोष रांका टीम के साथ जयपुर के रामपुरा गांव पहुंचे तो कुछ लोगों ने उन्हें पीट दिया।
दीपके ने वीडियो कॉल कर रांका से पूछा- और बताओ क्या हुआ? रांका ने जवाब दिया- वही हुआ जो तुम्हारे साथ हुआ था।
दीपके ने व्यवस्था की तुलना गधे से करते हुए कहा- ये लोग गधे हैं, तुम जाते चुपचाप वीडियो बनाकर आ जाते, कुछ लोग लाइक करते कुछ कमेंट करते। मामला शांत हो जाता। तुम्हें पीटकर उन्होंने इस मुद्दे को नेशनल इश्यू बना दिया।
हालांकि CJP के दखल के बाद अलवर में जोधावास के सरकारी स्कूल की जर्जर इमारत ढहा दी गई है। रामपुरा में स्कूल को तबेले से परचून की दुकान में शिफ्ट कर दिया गया है। कुछ तो हो रहा है।
बाकी उदयपुर में कीचड़ भरे रास्ते से नंगे पैर सरकारी स्कूल जाते बच्चों का वीडियो भी सामने आया है। CJP ने ऐसे मुद्दे उठाए हैं जिनके लिए राजस्थान में खाद-पानी की कोई कमी नहीं।

CJP फाउंडर अभिजीत दीपके और CJP प्रवक्ता आशुतोष रांका की बातचीत का वीडियो सामने आया है।
3. चलते-चलते..
क्रांतिकारी कब पैदा होते हैं? जवाब है – क्रांतिकारी चुनाव से पहले पैदा होते हैं। ऐसे क्रांतिकारी मौसमी होते हैं। ये बाढ़ के पानी की तरह चढ़ते हैं और उसी तरह उतर जाते हैं।
क्रांतिकारियों का हथियार क्या है? जवाब है- इंस्टाग्राम, यूट्यूब, फेसबुक क्रांतिकारियों के मारक हथियार हैं।
किसी जमाने में क्रांति करने के लिए क्रांतिकारी को पर्सनल फौज खड़ी करनी पड़ती थी। लेकिन अब 3 हथियारों की बदलौत क्रांतिकारी अकेले क्रांतिकर सकता है और डिजिटल फौज खड़ी कर सकता है।
अधिकतर डिजिटल क्रांतियां इसलिए फेल भी हो जाती हैं क्योंकि ये चुनावी होती हैं। कई क्रांतियां सफल भी हो जाती हैं और रोजगार जनरेट करती हैं।
बूंदी के केशोरायपाटन में वार्ड 17 है। वहां जाने के लिए एक नाला पार करना पड़ता है। नाले के नीचे पूरे शहर की गंदगी बहती है। नाला पाषाण युग में निर्मित प्रतीत होता है। ऐसे में उसके कभी भी गिर जाने की संभावना है।
जहां संभावना होती है, क्रांति वहीं जन्म ले लेती है। चुनावी मौसम में नाला भी क्रांति का उत्पादक बन सकता है। केशोरायपाटन में भी बना।
वार्ड 17 का एक जुझारू युवक नाले के पास दरी बिछाकर अकेले बैठ गया। उसने सोशल मीडिया पर आह्वान किया- मैं गांव को इस टूटे नाले से मुक्ति दिलाऊंगा। मुझे सिस्टम बदलना है।
वह राहुल गांधी की तर्ज पर एक लाल किताब जिस पर संविधान लिखा था, लेकर बैठ गया। उसकी आवाज में भगतसिंह और चंद्रशेखर आजाद जैसा जोश है।
लड़के को धूप में बैठे देख किसी ने टेन्ट तान दिया। एक-दो लोग और आकर बैठ गए। फिर मजमा लग गया। अब रील बनाने के शौकीन वहां पहुंच रहे हैं। जहां युवक सभी को टूटे नाले के दुष्प्रभाव गिना रहा है। उससे होने वाली संभावित दुर्घटना का बखान कर रहा है।
आचार संहिता के कारण युवक की क्रांति का परिणाम फिलहाल नया नाला नहीं हो सकता। ये जरूर संभावना है कि किसी पार्टी की ओर से उसे पार्षदी का टिकट मिल जाए और क्रांति सफल रहे।

बूंदी के केशोरायपाटन में वार्ड 17 में टूटे नाले को लेकर धरना देता स्थानीय युवक मनीष मेघवाल।






