
मूंग से मिर्च तक फसलों में कीटों की पहचान और नियंत्रण की समझाई तकनीक, छात्रों ने स्वयं किया कीटनाशक का छिड़काव
देवली/टोंक
पंडित दीन दयाल उपाध्याय कृषि महाविद्यालय, सिरोही देवली में डॉ. दयाशंकर मीणा ने कृषि विद्यार्थियों को फसल संरक्षण एवं वैज्ञानिक कीट प्रबंधन का महत्वपूर्ण व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया। डॉ. मीणा ने विद्यार्थियों को कक्षा की पढ़ाई से आगे बढ़ाते हुए सीधे खेत में ले जाकर फसलों में लगने वाले कीटों की पहचान से लेकर उनके प्रभावी नियंत्रण तक की जानकारी दी।
प्रशिक्षण के दौरान डॉ. दयाशंकर मीणा ने मूंग, उड़द, मक्का, मिर्च एवं काचरी की फसलों में लगने वाले विभिन्न हानिकारक कीटों के बारे में विद्यार्थियों को विस्तारपूर्वक समझाया। उन्होंने बताया कि फसल में कीटों की समय पर पहचान और उचित नियंत्रण बेहद जरूरी है। यदि शुरुआती अवस्था में कीट प्रकोप की पहचान कर वैज्ञानिक तरीके से उपचार किया जाए तो फसल को होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
खेत में कराया कीटनाशक छिड़काव का लाइव प्रशिक्षण

डॉ. मीणा ने विद्यार्थियों को कीटों की पहचान, प्रकोप के लक्षण, नियंत्रण के लिए आवश्यक कीटनाशकों, उनकी उचित मात्रा, सही समय और सुरक्षित छिड़काव की वैज्ञानिक तकनीक के बारे में जानकारी दी। इसके बाद विद्यार्थियों को खेत में ले जाकर स्वयं कीटनाशक का छिड़काव करवाया गया, जिससे उन्हें फसल संरक्षण की तकनीक का प्रत्यक्ष एवं व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हुआ।
इस दौरान विद्यार्थियों ने विभिन्न फसलों का बारीकी से निरीक्षण किया और खेत में मौजूद कीटों की पहचान करते हुए उनके नियंत्रण की प्रक्रिया को समझा। प्रशिक्षण ने विद्यार्थियों को सैद्धांतिक ज्ञान के साथ वास्तविक कृषि परिस्थितियों में निर्णय लेने और कीट प्रबंधन करने का व्यावहारिक कौशल प्रदान किया।
“कृषि की पढ़ाई किताबों तक नहीं, खेत तक पहुंचनी चाहिए”
डॉ. दयाशंकर मीणा ने कहा कि कृषि शिक्षा तभी प्रभावी बनती है, जब विद्यार्थियों को प्रयोगशाला और कक्षा के साथ खेत में भी वास्तविक परिस्थितियों का अनुभव मिले। किसानों के लिए भी यह आवश्यक है कि वे किसी भी कीटनाशक का प्रयोग बिना जानकारी के न करें, बल्कि फसल और कीट की सही पहचान के बाद उचित मात्रा एवं सही समय पर ही उसका प्रयोग करें।
उन्होंने विद्यार्थियों को संतुलित एवं वैज्ञानिक कीट प्रबंधन अपनाने पर जोर दिया तथा कीटनाशकों के उपयोग के दौरान आवश्यक सुरक्षा सावधानियों का पालन करने की जानकारी दी।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों में खासा उत्साह दिखाई दिया। खेत में स्वयं कीटनाशक का छिड़काव करने से विद्यार्थियों को फसल संरक्षण की तकनीकों को करीब से समझने और सीखने का अवसर मिला। इस प्रकार के व्यावहारिक प्रशिक्षण से कृषि विद्यार्थी भविष्य में किसानों तक वैज्ञानिक कृषि तकनीक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकेंगे।





