टीचर्स को 44 दिन की डाइट ट्रेनिंग दी:फिर भी ज्वॉइनिंग 19 अगस्त से दर्ज, बोले- डाक्यूमेंट्स में नियुक्ति 4 जुलाई से थी

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राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) अजमेर की वरिष्ठ अध्यापक भर्ती-2024 में चुने गए 1644 टीचर्स को अब स्कूलों में भेज दिया गया है। लेकिन इन टीचर्स के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। सवाल यह है कि 6 जुलाई से 18 अगस्त तक डाइट में दिए गए 44 दिनों को उनकी नौकरी के रिकॉर्ड में कैसे जोड़ा जाएगा।

इन टीचर्स के नौकरी से जुड़े आदेश 4 जुलाई 2026 को जारी हुए थे। इसके बाद शिक्षा विभाग ने उन्हें 6 जुलाई से डाइट में ओरिएंटेशन के लिए बुलाया था। टीचर्स ने 6 जुलाई से 18 अगस्त तक डाइट में रोज जाकर अपनी हाजिरी दी।

18 अगस्त को डाइट से उन्हें वहां से भेज दिया गया और अपने-अपने स्कूल में जाकर काम शुरू करने के लिए कहा गया। इसके बाद कई स्कूलों में उनकी स्कूल में काम शुरू करने की तारीख 19 अगस्त लिखी जा रही है। यही वजह है कि टीचर्स परेशान हैं। उनका कहना है कि जब उन्होंने 6 जुलाई से ही विभाग के कहने पर डाइट में जाकर काम से जुड़ी ट्रेनिंग और ओरिएंटेशन किया था, तो 6 जुलाई से 18 अगस्त तक के 44 दिन उनकी नौकरी में किस तरह जोड़े जाएंगे?

शिक्षक संघ रेसटा, राजस्थान के प्रदेशाध्यक्ष मोहर सिंह सलावद ने इन टीचरों की कार्यग्रहण तिथि 4 जुलाई से ही मानने की मांग माध्यमिक निदेशक से की है।

शिक्षक संघ रेसटा, राजस्थान के प्रदेशाध्यक्ष मोहर सिंह सलावद ने इन टीचरों की कार्यग्रहण तिथि 4 जुलाई से ही मानने की मांग माध्यमिक निदेशक से की है।

4 जुलाई को नौकरी का आदेश, 6 जुलाई से डाइट में हाजिरी

इन टीचर्स का कहना है कि उनकी नौकरी के आदेश 4 जुलाई को जारी हो गए थे। इसके बाद उन्हें 6 जुलाई से डाइट में ओरिएंटेशन के लिए बुलाया गया।

यानी टीचर्स ने अपनी तरफ से कोई छुट्टी नहीं की थी। वे शिक्षा विभाग के आदेश पर ही डाइट में गए और 44 दिन तक वहां हाजिरी दी।

अब जब स्कूल में उनकी काम शुरू करने की तारीख 19 अगस्त लिखी जा रही है, तो टीचर्स को डर है कि 6 जुलाई से 18 अगस्त तक की हाजिरी का रिकॉर्ड अलग न रह जाए।

44 दिन की हाजिरी का क्या होगा?

मान लीजिए किसी टीचर की स्कूल में काम शुरू करने की तारीख 19 अगस्त लिखी जाती है। ऐसे में सवाल उठता है कि 6 जुलाई से 18 अगस्त तक डाइट में जो 44 दिन टीचर मौजूद रहे, वे दिन उनकी नौकरी के रिकॉर्ड में कैसे गिने जाएंगे।

टीचर्स का कहना है कि उन्होंने ये 44 दिन अपनी मर्जी से नहीं बिताए थे। शिक्षा विभाग ने ही उन्हें डाइट में आने और ओरिएंटेशन करने के लिए कहा था।

इसलिए इन 44 दिनों को नौकरी का हिस्सा माना जाना चाहिए।

शिक्षा विभाग ने स्कूलों को साफ बात नहीं बताई

टीचर्स के अनुसार 18 अगस्त को डाइट से उन्हें स्कूल भेज दिया गया। लेकिन स्कूलों को ऐसा कोई साफ आदेश नहीं मिला है, जिसमें यह बताया गया हो कि डाइट में बिताए गए 44 दिनों को रिकॉर्ड में किस तरह लिखा जाए। इसी वजह से अलग-अलग जगहों पर अलग तरीके से रिकॉर्ड तैयार होने की बात सामने आ रही है।

टीचर्स चाहते हैं कि शिक्षा विभाग सभी स्कूलों के लिए एक जैसा और साफ आदेश जारी करे। इससे बाद में किसी टीचर को परेशानी नहीं होगी।

शिक्षक संघ ने 4 जुलाई से ही तारीख मानने की मांग की

शिक्षक संघ रेसटा, राजस्थान के प्रदेशाध्यक्ष मोहर सिंह सलावद ने माध्यमिक शिक्षा निदेशक से मांग की है कि इन सभी टीचर्स की स्कूल में काम शुरू करने की तारीख 4 जुलाई 2026 से ही मानी जाए। उनका कहना है कि नौकरी के आदेश 4 जुलाई को जारी हो गए थे। इसके बाद विभाग के कहने पर ही टीचर्स 6 जुलाई से डाइट में पहुंचे थे।

इसलिए 4 जुलाई से ही उनकी नौकरी की तारीख मानी जानी चाहिए और इसी हिसाब से वेतन भी दिया जाना चाहिए।

अगर 4 जुलाई नहीं मानते तो 44 दिन तो जोड़ें

मोहर सिंह सलावद ने कहा कि अगर शिक्षा विभाग 4 जुलाई से टीचर्स की नौकरी की तारीख नहीं मानता है तो कम से कम 6 जुलाई से 18 अगस्त तक डाइट में बिताए गए 44 दिनों को नौकरी के रिकॉर्ड में जोड़ने का साफ आदेश दिया जाए। उन्होंने कहा कि टीचर्स ने विभाग के आदेश पर डाइट में हाजिरी दी थी। इसलिए इन दिनों को रिकॉर्ड में लेकर कोई उलझन नहीं होनी चाहिए।

सभी 1644 टीचर्स के लिए एक जैसा आदेश मांगा

शिक्षक संघ का कहना है कि इस मामले में सभी 1644 चुने गए टीचर्स के लिए एक जैसा नियम होना चाहिए।

टीचर्स की मांग है कि शिक्षा विभाग साफ बताए कि:

  • 4 जुलाई से उनकी नौकरी की तारीख मानी जाएगी या नहीं।
  • 6 जुलाई से 18 अगस्त तक डाइट में दी गई 44 दिन की हाजिरी कैसे जोड़ी जाएगी।
  • इन 44 दिनों का वेतन मिलेगा या नहीं।
  • स्कूल के रिकॉर्ड में नौकरी शुरू करने की सही तारीख क्या लिखी जाएगी।
  • टीचर्स का कहना है कि अभी रिकॉर्ड साफ नहीं होने से आगे चलकर उनकी नौकरी से जुड़े मामलों में परेशानी हो सकती है। इसलिए शिक्षा विभाग को जल्द एक साफ आदेश जारी करना चाहिए।

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