
केस- 1: बेतिया की रहने वाली 17 साल की नाबालिग को उसके एक जानने वाले लड़के ने फंसाया, संबंध बनाए। इस दौरान वह गर्भवती हो गई। इस बात को 5 महीने तक घर वालों से छिपाती रही। प्रेग्नेंसी का असर जब शरीर पर दिखने लगा तो घर वालों को पता चल गया। डॉक्टर ने भी अबॉर्शन से मना कर दिया।

गांव की आशा वर्कर मददगार बनकर केस को हैंडल करने लगी। बदनामी का डर दिखाकर लड़की को अपने पास रख लिया। हॉस्पिटल में डिलीवरी कराई जहां नाबालिग ने बेटे को जन्म दिया। आशा ने बेटे को अपने पास रख लिया और लड़की को 15 हजार देकर घर भेज दिया। कुछ दिन बच्चे को हॉस्पिटल में रखने के बाद उसे बेच दिया गया। घर वालों को लगा कि आशा वर्कर भगवान थी, लेकिन वह कुंवारी कोख की सौदागर निकली।
केस- 2: पटना के गर्दनीबाग की रहने वाली 15 साल की नाबालिग का एक युवक से अफेयर था। नजदीकियां बढ़ी तो वह प्रेग्नेंट हो गई। पहले तो घर वालों से छिपाया, बाद में प्रेमी ने हॉस्पिटल ले जाकर डिलीवरी करवाई। नाबालिग ने बेटे को जन्म दिया, जिसे डॉक्टर बेचने की तैयारी में जुट गए। नाबालिग की मां की शिकायत पर 3 मार्च 2026 को पुलिस ने डॉक्टर और प्रेमी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस की जांच में डॉक्टर कुंवारी कोख का सौदागर निकला।
यह किसी थ्रिलर फिल्म की कहानी नहीं। बल्कि बिहार-यूपी में नवजातों की खरीद-बिक्री का नया ट्रेंड है। क्राइम के इस नए पैटर्न को एक्सपोज करने के लिए हमारी महिला रिपोर्टर आशा वर्कर बनकर 90 दिनों तक एजेंट्स के बीच रही। इस दौरान वह बिहार, यूपी, बंगाल और झारखंड 4 राज्यों में ऐसे नेटवर्क तक पहुंची जो 1000 से अधिक कुंवारी लड़कियों की कोख में पल रहे बच्चों को बेच चुके हैं।
भास्कर इन्वेस्टिगेशन में पढ़िए और देखिए बिन ब्याही मां के बच्चों की खरीद बिक्री की खौफनाक कहानी..।

नवजातों की खरीद-बिक्री के नए क्राइम पैटर्न को एक्सपोज करने के लिए हमारी महिला रिपोर्टर आशा वर्कर बनकर 90 दिनों तक एजेंट्स के बीच रही।
आशा वर्कर की साड़ी पहनकर गैंग के एजेंट्स के बीच पहुंची रिपोर्टर
बिन ब्याही मां के नवजातों की खरीद-बिक्री का नेटवर्क एक्सपोज करने के लिए भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम ने कई प्रयास किए, पर सफल नहीं हुए। दरअसल, हम वो किरदार नहीं थे, जो इस नेटवर्क का हिस्सा है। ऐसे में एजेंट्स तक पहुंचने के लिए आशा वर्कर की साड़ी अरेंज कर अंडर कवर महिला रिपोर्टर को आशा कार्यकर्ता बनाना पड़ा। किरदार में ढलने के लिए महिला रिपोर्टर को आशा वर्कर की स्टाइल, काम करने के तौर-तरीकों को लेकर ट्रेंड करना पड़ा। इसके बाद महिला रिपोर्टर एजेंट्स तक पहुंच पाई।
भास्कर रिपोर्टर बिहार, यूपी, बंगाल और झारखंड राज्यों के 20 जिलों में लगभग 150 से अधिक हॉस्पिटल और एजेंट्स के संपर्क में आई। आशा वर्कर की साड़ी में अंडर कवर रिपोर्टर से एजेंट्स ने न सिर्फ डील की, बल्कि इस नए पैटर्न की पूरी मोडस ऑपरेंडी समझी।

3 मार्च 2026 को पटना के गर्दनीबाग में कुंवारी लड़की के बेटे की खरीद-बिक्री का मामला सामने आया, इसलिए हमारी इन्वेस्टिगेशन पटना से शुरू हुई। आशा कार्यकर्ता बनकर अंडर कवर रिपोर्टर पटना के जीरो माइल पर 12 से अधिक हॉस्पिटल गई। इस दौरान नारायण क्रिटिकल केयर सेंटर का क्लू मिल गया। रिपोर्टर अस्पताल पहुंची तो मैनेजर मनोहर से मुलाकात हुई। मनोहर ने बच्चों की खरीद-बिक्री के लिए कई ऑफर दिए।
रिपोर्टर- मैं मोतिहारी में आशा कर्मी हूं, आपसे जुड़ती हूं तो क्या-क्या फायदा होगा?
मोहित- ज्यादातर मरीज प्रेग्नेंसी वाले मिलते होंगे, लाइए हम दोनों का काम हो जाएगा।
रिपोर्टर- कोई बिन ब्याही लड़की प्रेग्नेंट हो गई, 7 से 8 महीने बाद पता चला तो क्या होगा?
मोहित- डिलीवरी कराकर बच्चा बेच दिया जाएगा। चिंता नहीं करना है, यह सब मोटी कमाई का रास्ता है।
रिपोर्टर- ऐसे तो हमारे जिले में बहुत केस हैं।
मोहित- मेरे पास आ गई हैं तो कहीं जाने की जरूरत नहीं। हम खुद बच्चा हटवाते हैं।
रिपोर्टर- आपके पास आदमी हैं न जो ऐसा करते हों?
मोहित- गया का लड़का मेरे लिए काम करता है। लड़की प्रेग्नेंट हो गई, बच्चा नहीं रखना चाहती तो हॉस्पिटल में भर्ती कर बाद में बेच देते हैं।
रिपोर्टर- तब तो आप काम के आदमी हैं?
मोहित- 7 महीने में बच्चे को गर्भ से निकाल लेते हैं। बच्चों के डॉक्टर के पास भर्ती करा देते हैं। 9 माह का होने के बाद बेच देते हैं।
रिपोर्टर- कितना तक मिल जाता है?
मोहित- 2 से 2.5 लाख रुपए तो आम रेट है। बोलिए तो अभी पैसा दिला दूंगा।
नवजात की फोटो-वीडियो देखकर डील पक्की की
मोहित ने कुंवारी लड़कियों के बच्चों को इसलिए सेफ बताया, क्योंकि बाद में मां-बाप सामने नहीं आते हैं। मोहित को एक्सपोज करने के लिए रिपोर्टर ने एक फेक केस सुनाया। एक कुंवारी लड़की है, जिसकी प्रेग्नेंसी को 9 महीने पूरे हो चुके हैं। इस पर मोहित बोला लेकर आइए। इसके बाद वह रिपोर्टर को लगातार कॉल करने लगा।
मोहित बच्चे को 3 लाख की लॉटरी बताकर उसकी डिमांड करने लगा। जब रिपोर्टर ने मोहित को बताया कि डिलिवरी हो गई तो वह फोटो-वीडियो मांगने लगा। मोहित को एक्सपोज करने के लिए रिपोर्टर ने एक डमी नवजात की फोटो-वीडियो भेजी।
लड़का देखते ही मोहित ने 3 लाख रेट तय किए और एडवांस देने की जिद करने लगा। मोहित ने बताया कि पार्टी भूमिहार है, बच्चा लेकर आइए मोटा पैसा मिल जाएगा। परिवार वालों को एक लाख देकर बाकी की रकम आधी-आधी बांट लेंगे।

नारायण क्रिटिकल केयर के सफाई कर्मचारी से तिरुपति इमरजेंसी हॉस्पिटल के मैनेजर प्रवीण का इनपुट मिला। रिपोर्टर तिरुपति इमरजेंसी हॉस्पिटल पहुंची। मैनेजर प्रवीण आशा की साड़ी में रिपोर्टर को देख डील के लिए तैयार हो गया। प्रवीण ने कुंवारी लड़कियों की प्रेग्नेंसी के केस में कमाई का अलग-अलग तरीका बताया। DNC से लेकर बच्चों की खरीद-बिक्री तक के लिए डील की।
रिपोर्टर – आप बता दें, कैसे काम होता है?
प्रवीण- मेरे यहां जो बच्चा होगा, उसमें पैसा मरीज को देना होगा। बाकी बच्चे को हम दूसरी जगह देंगे, तो वो मामला अलग है। आप इसके अलावा और भी मरीज लाइए, उसमें भी पैसा मिलेगा। मेरे यहां जिस बच्चे की डिलिवरी होगी, उसे पहले स्टेबल करेंगे, फिर आगे दिया जाएगा।
हम लोग कोई पाप नहीं कर रहे हैं। एक जगह से बच्चों की जिंदगी बचाकर दूसरी जगह सूनी गोद को भर रहे हैं। आप मेरा पूरा सेटअप देख लीजिए, आपको यहां कोई परेशानी नहीं होगी। बच्चे के पैदा होने के बाद मेरे पास NICU की पूरी व्यवस्था है। कहीं भी बाहर जाने की जरूरत नहीं है। बच्चा भी सुरक्षित और हम लोग भी सुरक्षित रहेंगे। दूसरी जगह NICU की व्यवस्था नहीं है। बाहर में रखने में परेशानी होती है, एक भी केस फंसा तो जेल जाना होगा।

प्रवीण से बातचीत के दौरान ही हमें पटना के लाइफ हॉस्पिटल का इनपुट मिला। आशा वर्कर बनकर जब महिला रिपोर्टर जीरो माइल के लाइफ हॉस्पिटल पहुंची तो मैनेजर हर्षित ने कुंवारी लड़कियों की प्रेग्ननेंसी को कमाई के लिए ब्लैंक चेक बताया। बातचीत के दौरान हर्षित ने हॉस्पिटल में मरीज लाकर डिलिवरी कराने और बच्चों को बेचने का पूरा प्लान बताया।
हर्षित ने बताया कि अगर कुंवारी लड़की प्रेग्नेंट है तो उसका DNC हो जाएगा। हालांकि, DNC कैसे होगा और इसकी पूरी प्रोसेस क्या है, इस सवाल पर हर्षित ने कहा कि इसके बारे में हमारे डॉक्टर साहब बताएंगे। लेकिन उसने इसमें डर दिखाकर पैसा कमाने का रास्ता बताया।
हर्षित ने दावा किया कि पटना में नवजात बच्चों की बहुत डिमांड है। अगर कुंवारी लड़की का बच्चा है तो उसकी डिमांड और होती है। इसलिए ऐसी लड़कियों को ही टारगेट पर रखना है। इसमें मां-बाप कभी सामने नहीं आते हैं, इसलिए बेचने और खरीदने में कोई झंझट नहीं है। इस रैकेट में डॉक्टर के भी शामिल होने का संकेत दिया।
हर्षित ने DNC से लेकर बच्चा बेचने के पूरे प्लान के लिए एक-दो दिन बाद डॉक्टर से सीधी डील कराने की बात कही। उसने बताया कि यहां सब कुछ व्यवस्था है। बस आप लड़की को लेकर आइए। हमारे यहां NICU की भी व्यवस्था है। बच्चा होने के बाद उसे वहीं शिफ्ट कर दिया जाएगा, बाद में उसे कहीं एडजेस्ट कर दिया जाएगा।

पटना में इन्वेस्टिगेशन के दौरान महिला रिपोर्टर को बेतिया में चल रहे बड़े नेक्सेस के बारे में पता चला। एक-एक कड़ी जोड़ते हुए रिपोर्टर अष्टविनायक मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल पहुंची। यहां मैनेजर नीरज ने चौंकाने वाला खुलासा किया।
नीरज ने दावा किया कि अब तक वह 500 बच्चाें की बिक्री कर चुका है। ये वही बच्चे हैं जो कुंवारी लड़कियों के गर्भ से पैदा हुए हैं। नीरज के मुताबिक, ऐसे बच्चों का बड़ा मार्केट है, क्योंकि भविष्य में कभी DNA जांच की नौबत नहीं आती है। महिला रिपोर्टर ने सवाल किया कि बच्चे कहां किसने लिए तो नीरज इसे बड़ा राज बताकर चुप्पी साध ली।
रिपोर्टर- बच्चा नाजायज है और लड़की कुंवारी है, उसका डिस्चार्ज होना शुरू हो गया है, क्या करें अब?
नीरज- करना कुछ नहीं है, बच्चा होने दीजिए, रख लिया जाएगा। बच्चे को ठिकाने लगाने का काम मेरा है।
रिपोर्टर- कोई मामला तो नहीं फंसेगा?
नीरज- बच्चे के परिजन को तो छोड़िए, आपको भी पता नहीं चलेगा कि बच्चा कहां गया। बस आप सामने खड़े रहिएगा, सब हो जाएगा। एक प्रतिशत भी दिक्कत नहीं होगी।
रिपोर्टर- लड़की की उम्र 17 साल है, डिलिवरी सेफ है ना?
नीरज- हो जाएगा, दिक्कत नहीं है। नॉर्मल हो जाएगा, एक छोटा सा ऑपरेशन कर बच्चा निकाल दिया जाएगा।
रिपोर्टर- कहीं बड़ा ऑपरेशन करना पड़ा तो?
नीरज- नहीं छोटे से ऑपरेशन से निकाल लेंगे, बड़े ऑपरेशन से दाग रह जाता है।
छोटा चीरा लगाकर, नॉर्मल डिलिवरी करा देंगे
बच्चे के लिए नीरज ने लड़की की जबरन नॉर्मल डिलिवरी कराने का दावा किया। बोला- लड़की कुंवारी है ना, तो ऑपरेशन से नहीं किया जाएगा। जैसे भी हो नॉर्मल ही कराया जाएगा। इस डील के बाद नीरज परेशान हो गया। उसने बच्चे को बेचने की भी पूरी प्लानिंग कर ली। नीरज ने कहा, आधे घंटे के बाद आप हमको कॉल करिए, फिर सब बताएंगे। हॉस्पिटल में लोगों के सामने बात करना सेफ नहीं है। अब तक हमने 500 बच्चों को ऐसे ही डिलिवरी कराकर बेचा है।
नीरज ने दावा किया कि बच्चों को मोतिहारी, मुजफ्फरपुर से लेकर बिहार और यूपी के अलग-अलग जिलों में बेचा है। हॉस्पिटल लाइन में 14 साल से काम कर रहा हूं, लेकिन इस हॉस्पिटल में 1 साल से काम कर रहा हूं। एक साल में ऐसे ही बहुत से केस की डील की है। अगर कुछ सीरियस कंडिशन रहेगी तो मोतिहारी ले जाएंगे। लड़की को जितना दूर रखा जाएगा, उतना अच्छा रहेगा। हमको भी बचना है और लड़की को भी बचाना है।

एजेंट नीरज ने दावा किया कि वो अबतक 500 बच्चों को बेच चुका है, आजतक नहीं पकड़ा गया।
अल्ट्रासांउड में लड़का है तो समझिए लॉटरी निकली
कुंवारी लड़की की प्रेग्नेंसी केस की डील के लिए एजेंट नीरज बेचैन था। महिला रिपोर्टर के वहां से वापस आते ही आधे घंटे में उसका कॉल आया। नीरज ने कहा, अल्ट्रा साउंड में लड़का निकला है, आप खुद देखी हैं? रिपोर्टर के हां करते ही उसने खुशी से कहा, हम लोगों की लॉटरी लग गई। डॉक्टर से बात हो गई है। वे बोले हैं, हो जाएगा। आप मरीज को लेकर आइए, सब लाइनअप हो गया है। बच्चा जो लेगा, वो आपसे कोई बात नहीं करेगा, उनको बस बच्चा लेना है और जाना है। किसी से किसी को मतलब नहीं होगा। 2 से 3 डॉक्टर से बात की है, लेकिन जो मेरे काम को पहले करेगा, उसको काम देंगे। पेमेंट जो कम लेगा और आपको भी न फंसाए, हमको भी दिक्क्त नहीं हो, उसी को काम दिया जाएगा।
मैनेजर का दावा आस्था नर्सिंग से होगी बच्चे की डील
फोन पर नीरज ने बेतिया के आस्था नर्सिंग होम का नाम लिया। दावा किया कि आप आस्था नर्सिंग होम में मरीज को लेकर पहुंचिए। वहां डॉक्टर राकेश सर की मैडम नीतू हैं, वही करेंगी। हम सब सेट करके दे देंगे। आपसे पूछेंगे कि हम कौन हैं, तो बस बोलिएगा कि नीरज जी मेरी मौसी के लड़के हैं। हम जिस औरत को आपके साथ रखेंगे, उसे आपकी रिश्तेदार बना देंगे। वो वहां की सुपरवाइजर हैं, वही सब करेंगी। कोई आपसे कुछ नहीं पूछेगा। आपको लड़की के साथ बाहर भेज दिया जाएगा, बच्चा हम रख लेंगे। लड़की को अपनी बहन बताइएगा, बाकी कागज और साइन हम संभाल लेंगे।
रिपोर्टर- मैं तो आशा वाला काम करती हूं।
नीरज- मैं आपको देखकर ही समझ गया, हमको 14 साल हो गया इस लाइन में।
रिपोर्टर- मेरे पास ऐसी और भी लड़की हैं, जो स्कूल-कॉलेज में पढ़ती हैं, कम उम्र की हैं, तो आपके पास हम लेकर आएंगे तो मेरा साइड से क्या फायदा होगा?
नीरज- हां, वो हम करा देंगे, उसके लिए टेंशन नहीं लेना है। ये गलती नहीं है, ऐसा तो मस्ती में हो जाता है। इसके बाद जो आगे होगा, उसमें आपको हर बच्चे का 20-50 हजार मिल जाएगा। क्लाइंट के ऊपर डिपेंड करता है। बच्चा जिसके पास जाएगा, वो पार्टी कैसी है। उसी हिसाब से सब तय होगा। कम उम्र हो तो कोई दिक्कत नहीं है। वैसा रहेगा तो छोटा ऑपरेशन होगा। आप कंफर्म हैं न कि पेट में लड़का है।
रिपोर्टर- हां, अल्ट्रासाउंड करवाए हैं।
नीरज- अगर गलत हो गया अल्ट्रासाउंड और लड़की हो गई तो? जिसको हमें बच्चा देना है, उसे पहले से 5 लड़कियां हैं। अभी तो ज्यादा लोगों से बात नहीं की है। 2 लोगों से की है, तो दोनों को बेटा चाहिए। अल्ट्रासाउंड के समय आप साथ में गई थीं, आपको सामने से दिखाया था कि बेटा है?
रिपोर्टर- हां, हम देखे हैं, तब तो आपको बोल रहे हैं।
नीरज- तब तो जाने दीजिए, अपना काम बन गया। इसके पहले हम लोग जो बात किए हैं कि आपके पास ऐसी और लड़की है। उसके लिए मैंने 4-5 लोगों से बात की है, बैकअप के लिए। हम जुगाड़ कर रहे हैं। इसमें कुछ डॉक्टर भी हैं, वो लोग पैसे वाली पार्टी हैं, तो अच्छे पैसे देंगे। हम लोग पहले पुण्य कर लेते हैं, फिर पाप तो करना ही है। पहले जिसको नहीं है, उसको दे देंगे, तो वो बाकी लोगों को बताएगा। ऐसे धीरे-धीरे काम हम लोगों का बढ़ेगा। आपके पास तो आते रहते हैं ऐसे लोग। जिस डॉक्टर से हमने बात की है, वो दरभंगा के हैं, सतीश कुमार। उन्होंने बुलाया है मैडम से मिलने। उनको भी बच्चा नहीं है, तो वो लेंगे। कुछ बिजनेसमैन हैं, कुछ और भी बड़े लोग हैं।

बेतिया में इन्वेस्टिगेशन के दौरान एजेंट नूरजहां का नंबर मिला। रिपोर्टर ने नूरजहां को कॉल किया तो उसने खुलकर कुंवारी लड़की की डिलिवरी से लेकर बच्चे की बिक्री की पूरी डील की।
नूरजहां ने बताया कि बेतिया में GMCH मेडिकल के पास पहुंचिए वहीं बात हो जाएगी। महिला रिपोर्टर वहां पहुंची तो नूरजहां अपनी बहन के साथ आई। उसने पूरी तरह तहकीकात की, जिसके बाद डील करने को तैयार हो गई।
रिपोर्टर- मेरे पड़ोस में एक लड़की प्रेग्नेंट हो गई है। बहुत देर से पता चला, जब पेट दिखने लगा। आठ महीना हो गया। अब क्या करें?
नूरजहां- बहुत दिन हो गया, अब तो आपको उसको इश्यू कराना होगा। ये कर सकते हैं कि लड़की को कहीं छिपाकर रखें और जब बच्चा हो जाए तो लड़की को छोड़ देंगे, क्योंकि इतना दिन में DNC नहीं होता। लड़की को आप बुलाइए, डिलिवरी करा दिया जाएगा।
रिपोर्टर- बच्चे का क्या होगा?
नूरजहां- बच्चे को हम ही रख लेंगे या ये रख लेगी। लड़की को रखकर बच्चा करा लेंगे। रूम दिला दूंगी। मेरी बहन का बच्चा नहीं है, इनकी बहू का भी नहीं है। किसी को दे देंगे। आठ महीना हो गया है, बस एक महीने की बात है। आप लड़की को मेरे पास लेकर आइए।
रिपोर्टर- तब तो आप बहुत बड़ा काम कर दीजिएगा।
नूरजहां- लड़की की फोटो है क्या?
रिपोर्टर- नहीं, रखे हैं।
नूरजहां ने बताया सरकारी हॉस्पिटल का कनेक्शन
नूरजहां ने डील के दौरान सरकारी हॉस्पिटल से कुंवारी लड़कियों के बच्चों की बिक्री का राज खोला। नूरजहां ने कहा, आप लड़की को एक महीना और रखिए, सब हो जाएगा। आठवें महीने में DNC बहुत रिस्की है, लड़की मर भी सकती है। डिलीवरी सरकारी अस्पताल में करा देंगे, पैसा भी नहीं लगेगा। बहुत कुंवारी लड़की आती है। हम लोग रहेंगे ना, कोई कुछ नहीं कहेगा वहां। सब हॉस्पिटल में अच्छे से करा देंगे। वो लोग तो खुश होते हैं कि कोई आए और बच्चा छोड़कर जाए। कितने लोग तो ऑफर देकर बच्चा ले लेते हैं। लड़की को हमसे मिलवा दीजिए। पेट भी नहीं खुलेगा, गारंटी है। हम साथ में रहकर करवा देंगे। वहां हमारी पहचान है। एक साल पहले एक लड़की बच्चा छोड़कर चली गई और कोई बड़ा आदमी आकर बच्चा ले गया। बहुत बड़े-बड़े लोग ले जाते हैं बच्चा। आप जल्दी से पहले लड़की लेकर आइए।

महिला रिपोर्टर ने हॉस्पिटल एजेंट्स और आशा वर्कर से डील की, इस दौरान पूरे नेक्सस की उस पर नजर थी।
रिपोर्टर को हर पल पकड़े जाने का खौफ
महिला रिपोर्टर को हर पल पकड़े जाने का डर था। वह एजेंट्स आशा और हॉस्पिटल के बीच डील कर रही थी। इधर, नेटवर्क महिला रिपोर्टर की भी पड़ताल करने में जुटा था। मोतिहारी में एक एजेंट्स को संदेह भी हुआ, लेकिन बड़ी सावधानी से रिपोर्टर बाहर निकली। बच्चों की खरीद बिक्री करने वाला नेटवर्क बहुत बड़ा और खतरनाक है। ऐसे में महिला रिपोर्टर के साथ कोई भी घटना हो सकती थी। 90 दिनों तक महिला रिपोर्टर के लिए हर एक स्टेप पर रिस्क था।
टारगेट कर प्रेग्नेंट करना इनकी मोड्स अपरेंडी का पार्ट
पूरी पड़ताल में ये भी सामने आया कि आशा और गांव में हॉस्पिटल के संपर्क में रहने वाली महिलाएं ऐसे मनचले लड़कों के संपर्क में रहती हैं जो स्कूल- कॉलेज गोइंग नाबालिग लड़कियों को टारगेट कर दोस्ती करते हैं। इसके बाद उनका टारगेट लड़कियों को प्रेग्नेंट कर खुद साइड हो जाना होता है।
लड़कों के साइड होते ही महिला हेल्थ वर्कर लड़की के परिवार वालों को अपने झांसे में लेती हैं। साथ ही खरीदने वाले को भरोसे में लेती हैं कि ऐसे बच्चों के लिए बाद में कोई क्लेम नहीं करेगा। ना कोई डीएनए जांच होगी और ना ही मां-बाप सामने आएंगे। भास्कर की इन्वेस्टिगेशन में यह भी सामने आया है कि पटना पुलिस भी ऐसे केस का खुलासा कर चुकी है।
बदनामी और जिंदगी का डर दिखाकर डील करना
कुंवारी कोख का पूरा धंधा इज्जत और बेटियों की जिंदगी का खतरा बता कर चल रहा है। लड़कियां जब प्रेग्नेंट हो जाती हैं तो गांव और छोटे बड़े अस्पतालों से जुड़ी हेल्थ वर्करों का रैकेट उन्हें टारगेट कर लेता है।
एक तरफ बदनामी का डर होता है, दूसरी तरफ हेल्थ वर्कर जब लड़कियों के अबॉर्शन में मौत का डर दिखाती हैं तो परिवार को कुछ नहीं समझ में आता है। ऐसे में हेल्थ वर्करों का नेटवर्क एक्टिव हो जाता है, पूरी डील करता है। ऐसी नाबालिग लड़कियों के बच्चे कम खर्च में मिल जाते हैं। कम खर्च में ही बच्चों की डिलिवरी कराकर हेल्थ वर्कर हॉस्पिटल और डॉक्टर्स और एजेंट्स के माध्यम से बच्चों को बेच देती हैं।
एजेंट के साथ सरकारी और प्राइवेट हॉस्पिटल का नेटवर्क
एजेंट्स और हॉस्पिटल से डील में यह बात साफ हो गई थी कि इस पूरे खेल में पूरा नेक्सेस काम कर रहा है। सामानों की तरह बच्चों की बिक्री हो रही है। नेटवर्क में प्राइवेट और सरकारी हॉस्पिटल तक शामिल हैं। लेकिन अब सवाल था कि कुंवारी लड़कियों को कैसे ये गिरोह अपना शिकार बनाते हैं? कैसे पेट में पल रहे बच्चे का सौदा होता है? लड़का-लड़की और जाति के आधार पर कैसे बच्चे के पैदा होने से पहले ही उसका सौदा किया जाता है? खरीददार तक बच्चा कैसे पहुंचता है? और इस पूरे खेल में पैसे का बंटवारा कैसे होता है?
इन सवालों का जवाब जानने के लिए हमारी पड़ताल आगे बढ़ी। हमने उन लोगों तक पहुंचने की कोशिश की, जो इस पूरे नेटवर्क में बच्चे को अस्पताल से बाहर निकालकर खरीददार तक पहुंचाने का दावा कर रहे थे। ऐसे सवालों के जवाब जानने के लिए महिला रिपोर्टर और साथी रिपोर्टर ने नि:संतान दंपती बनकर सेकेंड लाइन से इन्वेस्टिगेशन की, जिससे और बड़े खुलासे हुए।







