NEET- 22 सुसाइड, वादे के बावजूद मुआवजा किसी को नहीं:14 परिवारों तक पहुंचा भास्कर, बोले- CJP से भी कोई नहीं आया

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दिल्ली के जंतर-मंतर पर NEET पेपर लीक के विरोध में 20 जून से शुरू हुआ प्रदर्शन करीब 36 दिन चला। सरकार के तीन वादों के बाद 25 जुलाई को खत्म हुआ।

पहला: शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा। दूसरा: पेपर लीक के बाद खुदकुशी करने वाले छात्रों के परिवारों को एक करोड़ रुपए मुआवजा। तीसरा: सभी प्रदर्शनकारियों पर दर्ज FIR वापस होगी।

पहला वादा पूरा हो गया। धर्मेंद्र प्रधान ने 25 जुलाई को इस्तीफा दे दिया। बाकी दो वादे एक महीने बाद भी अधूरे हैं। पेपर लीक के बाद 22 NEET स्टूडेंट्स ने सुसाइड किया था। दैनिक भास्कर ने इनमें से 14 के परिवार से बात की। पढ़िए रिपोर्ट…

पहला परिवार दिल्ली की अंशिका का पढ़ाई के साथ काम किया, पेपर लीक ने तोड़ा डॉक्टर बनने का सपना

दिल्ली के आजाद नगर की जेजे कॉलोनी। इतनी संकरी गलियां कि निकल पाना मुश्किल है। यहीं रहने वाली अर्चना पांडे ने डॉक्टर बनने का सपना देखा था। उसने डायरी में लिख रखा था- ‘मैं NEET निकाल चुकी हूं। MBBS कर रही हूं। अब मेडिकल स्टूडेंट हूं।‘

NEET रद्द होने के 10 दिन बाद 14 मई को अंशिका ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। उसका डॉक्टर बनने का सपना, सपना रह गया। हम अंशिका के घर पहुंचे। परिवार में माता-पिता, भाई-बहन और दादी हैं। पूरा परिवार 8×10 के कमरे में रहता है।

पिता इंद्रधर पांडे कहते हैं, ‘बेटी पढ़ने में होशियार थी। ये उसका तीसरा अटैम्प्ट था। उसे एग्जाम क्लियर होने का पूरा भरोसा था, लेकिन पेपर लीक होने से वो टूट गई।‘

वे डायरी दिखाते हैं, जिसमें लिखा है, ‘तुम इस दुनिया में अचानक से किसी जादू के जैसे आ गई हो। इस जादू को समझने की कोशिश तो करो। दुनिया संभावनाओं से भरी है।‘

पिता बताते हैं, ‘पुलिस ये डायरी देखने ले गई थी कि कहीं इसमें सुसाइड नोट तो नहीं। इसमें लिखी इन्स्पिरेशनल बातें पढ़कर पुलिस भी हैरान रह गई कि ये लड़की खुदकुशी कैसे कर सकती है।‘

अंशिका की डायरी की तस्वीर, जिसमें लिखा है- ‘मैं NEET निकाल चुकी हूं। MBBS कर रही हूं। अब मेडिकल स्टूडेंट हूं।‘

अंशिका की डायरी की तस्वीर, जिसमें लिखा है- ‘मैं NEET निकाल चुकी हूं। MBBS कर रही हूं। अब मेडिकल स्टूडेंट हूं।‘

अंशिका जिस कमरे में रहती थी, वो पीरियोडिक टेबल, कोट्स और टाइमटेबल से भरा हुआ है। एक दीवार पर लिखा है- ‘मैं सफलता पाकर रहूंगी। हार नहीं मानूंगी।‘

अंशिका जिस कमरे में रहती थी, वो पीरियोडिक टेबल, कोट्स और टाइमटेबल से भरा हुआ है। एक दीवार पर लिखा है- ‘मैं सफलता पाकर रहूंगी। हार नहीं मानूंगी।‘

ये सब दिखाते हुए पिता का गला भर आया। वे कहते हैं, ‘मेरी बेटी हारना नहीं चाहती थी, लेकिन सरकार ने उसे हार मानने के लिए मजबूर कर दिया।‘

ये सुनते ही मां रोने लगती हैं। मां बिना कैमरे पर आए कहती हैं, ‘मेरे बच्चों में वो सबसे होनहार थी। वो खुद भी पढ़ती थी और 12वीं पढ़ रहे छोटे भाई को भी पढ़ाती थी।‘

अंशिका के घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है, इसलिए वो मॉल में भी काम करती थी।

अंशिका के घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है, इसलिए वो मॉल में भी काम करती थी।

परिवार के साथ अंशिका की बचपन की तस्वीरें।

परिवार के साथ अंशिका की बचपन की तस्वीरें।

क्या सरकार से मुआवजा मिला?

पिता इंद्रधर कहते हैं, ‘नहीं, सरकार से किसी ने संपर्क नहीं किया। पुलिस प्रशासन भी नहीं आया। CJP ने हमारे नाम पर पूरा आंदोलन किया, लेकिन वो भी अब तक नहीं आए। हम आंदोलन के दौरान जंतर-मंतर भी गए थे, लेकिन लौट आए। वहां हम किसी को जानते नहीं थे, न किसी ने हमसे बात की।’

इंद्रधर के मुताबिक, आम आदमी पार्टी और कांग्रेस नेताओं ने कई बार फोन किया, लेकिन BJP से किसी ने संपर्क नहीं किया। वे कहते हैं, ’मुआवजे से क्या होगा। हमारे परिवार का एक व्यक्ति नहीं रहा। परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी भी मिलनी चाहिए।’

दूसरा परिवार अहमदाबाद के काहान का सरकार की तरफ से कोई मिलने नहीं आया, डेथ सर्टिफिकेट बनवाना भी मुश्किल

17 साल का काहान पटेल 3 मई को NEET एग्जाम देकर लौटा तो पिता प्रशांत पटेल को फोन कर कहा- ’पापा आज बहुत खुश हूं। दोस्तों के साथ डिनर पर जा रहा हूं।’

काहान अहमदाबाद में NEET की तैयारी कर रहा था। पिता ने पूछा, ‘सूरत कब आओगे?‘ जवाब मिला, ‘पापा, अभी नहीं… बाद में बताऊंगा।‘

उसे अबकी पूरा भरोसा था कि उसका डॉक्टर बनने का सपना पूरा हो जाएगा। एग्जाम देकर लौटने के बाद उसने अपनी सारी किताबें जूनियर्स को दे दी थीं।

पिता प्रशांत बताते हैं, ‘काहान बचपन से पढ़ने में तेज था। चौथी क्लास तक सूरत में पढ़ा और लगातार टॉप आता रहा। नौवीं में अहमदाबाद आया। 10वीं के बाद उसने बायोलॉजी लेकर डॉक्टर बनने की इच्छा जताई। हमने समझाया कि परिवार में किसी ने साइंस नहीं पढ़ी, थोड़ी मुश्किल आएगी। उसने कहा, ‘पापा, मैं कर लूंगा और नीट की तैयारी करने लगा। मैं कहीं घूमने जाने का भी कहता, तो मना कर देता।’

18 जून की सुबह काहान के पेरेंट्स जब कमरे में पहुंचे, तो लैपटॉप खुला था। बिस्तर पर किताबें और कलम बिखरे थे, लेकिन काहान नहीं था।

18 जून की सुबह काहान के पेरेंट्स जब कमरे में पहुंचे, तो लैपटॉप खुला था। बिस्तर पर किताबें और कलम बिखरे थे, लेकिन काहान नहीं था।

12 मई की सुबह प्रशांत ने अखबार में पेपर लीक की खबर पढ़ी। बेटे को पता न चले इसलिए अखबार छिपा दिया। वे बताते हैं, ‘सोचा कि बेटे को पता न चले, लेकिन कुछ ही देर बाद कोचिंग संस्थान से उसे पेपर लीक की खबर मिल गई। कुछ दिनों बाद पता चला कि NEET का री-एग्जाम होगा।‘

पिता बताते हैं, ‘री-एग्जाम के बारे में सुनकर वो गुस्से में आ गया। मैंने पहली बार उसे इतने गुस्से में देखा था। वो बार-बार पूछता रहा- क्या यही सिस्टम है। क्या सब ऐसे चलता है। मेरी क्या गलती है। उन छात्रों की क्या गलती है, जिन्होंने ईमानदारी से एग्जाम दिया। सरकार इसे इतने हल्के में क्यों ले रही है।’

’मैंने समझाने कि यही सिस्टम है, हम क्या कर सकते हैं। अब लगता है कि कहीं मेरे ये शब्द उसके लिए तसल्ली की जगह बेबसी की वजह न बन गए हों।’

काहान के पसंदीदा गिटार की फोटो। NEET एग्जाम की तैयारी के लिए उसके स्टडी रूम में रखा स्टडी मटेरियल।

काहान के पसंदीदा गिटार की फोटो। NEET एग्जाम की तैयारी के लिए उसके स्टडी रूम में रखा स्टडी मटेरियल।

री एग्जाम से महज तीन दिन पहले 17 जून को काहान ने अपनी बिल्डिंग की छठवीं मंजिल से कूदकर जान दे दी। परिवार को जरा भी अंदाजा नहीं था कि वो ऐसा कदम उठा सकता है।

पिता बताते हैं, ‘मौत से एक दिन पहले तक सब सामान्य था। 17 जून की शाम उसने ऑस्ट्रेलिया में रह रहे दादा से वीडियो कॉल पर बात की थी। हमें आखिरी वक्त तक पता नहीं चला कि उसके मन में क्या चल रहा था।‘

मुआवजे के बारे में पूछने पर वे कहते हैं, ‘बेटा चला गया, अब मुआवजा लेकर क्या करेंगे। हालांकि, अब तक सरकार या किसी अधिकारी ने संपर्क नहीं किया है। उससे बड़ी तकलीफ ये है कि बेटे की मौत के बाद उसका डेथ सर्टिफिकेट बनवाने में भी दिक्कत आ रही है। पुलिस वाले बात तक नहीं सुन रहे हैं।‘

तीसरा परिवार हरियाणा की सिमरन का बेटी ने खाना बनाया, साथ खाया; कुछ देर बाद जान दे दी

सिमरन के परिवार से मिलने हम हरियाणा के हिसार पहुंचे। पिता रोहतास कुमार बेटी को याद करते हुए बताते हैं, ‘21 जून की बात है। सिमरन ने रोटी-रायता बनाया और हमने साथ में खाना खाया। हम कुछ देर के लिए बाहर गए, घर लौटे तो देखा बेटी उल्टी कर रही है। अस्पताल ले जाने पर बेटी ने बताया कि उसने कीटनाशक खा लिया है। कुछ देर बाद उसकी मौत हो गई।’

पिता बेटी की जीती हुई ट्रॉफियां दिखाते हुए कहते हैं, ‘वे हमेशा टॉप करती थीं। उसने BSc एग्रीकल्चर में एडमिशन लिया था। कई दूसरे एग्जाम भी निकाले थे। वो कहती थी कि मैं ये एग्जाम देकर अपनी मेंटल एबिलिटी चेक करती हूं। करना MBBS ही है।‘

रोहतास कहते हैं, ‘उसका सपना, मेरा भी सपना बन गया था, लेकिन पेपर लीक ने सिर्फ मेरी बेटी का नहीं, पूरे परिवार का सपना छीन लिया।‘ मुआवजा के बारे में पूछे जाने पर वे कहते हैं, ‘सरकार ने अब तक संपर्क नहीं किया।‘

सिमरन परिवार के साथ रहकर हरियाणा के हिसार में ही NEET की तैयारी कर रही थी।

सिमरन परिवार के साथ रहकर हरियाणा के हिसार में ही NEET की तैयारी कर रही थी।

बाकी परिवार भी बोले- सरकार और CJP में से किसी ने संपर्क नहीं किया

यूपी, हरियाणा, राजस्थान, उत्तराखंड, गुजरात, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, दिल्ली और मध्य प्रदेश के उन परिवारों से मिले और फोन पर बातचीत की, जिन्होंने अपने बच्चे खोए हैं। यूपी के महराजगंज से लेकर महाराष्ट्र के अहिल्यानगर तक सभी परिवारों का कहना है कि मुआवजे को लेकर सरकार की ओर से अब तक उनसे किसी ने संपर्क नहीं किया। ना ही आंदोलन खत्म होने के बाद CJP नेताओं ने उनसे कोई बातचीत की।

महाराष्ट्र के अहिल्यानगर में 19 साल की अंकिता सांगले ने NEET एग्जाम देने के बाद सुसाइड कर लिया था। उसने नोट में लिखा कि उम्मीद के मुताबिक कामयाबी नहीं मिली। डॉक्टर बनने का सपना अधूरा रह गया।

महाराष्ट्र के अहिल्यानगर में 19 साल की अंकिता सांगले ने NEET एग्जाम देने के बाद सुसाइड कर लिया था। उसने नोट में लिखा कि उम्मीद के मुताबिक कामयाबी नहीं मिली। डॉक्टर बनने का सपना अधूरा रह गया।

कॉकरोच जनता पार्टी बोली- सरकार ने लेटर का जवाब नहीं दिया, 5 सितंबर को फिर मार्च

परिवारों से मुलाकात के बाद हम CJP प्रवक्ता सौरव दास से मिले और पीड़ित परिवारों को मुआवजा मिलने के बारे में पूछा। सौरव ने बताया, ‘हमने मुआवजे के लिए सरकार को लेटर लिखा है, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं मिला है। इसी वजह से CJP ने फिर सड़क पर उतरने का फैसला किया है। 5 सितंबर को दिल्ली के जंतर-मंतर से पुलिस मुख्यालय तक मार्च निकालेंगे। इसमें जान गंवाने वाले स्टूडेंट्स के परिवार भी शामिल होंगे।‘

स्टूडेंट्स के परिवारों और CJP के आरोपों को लेकर हमने सरकार से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। जवाब आने पर खबर में अपडेट करेंगे।

प्रदर्शन से जुड़ीं FIR वापस

जंतर-मंतर पर 20 जुलाई की हिंसा के बाद दिल्ली, यूपी, बिहार समेत कई राज्यों में 121 से ज्यादा FIR दर्ज हुई थीं। कई मामलों में आरोपियों के नाम तक दर्ज नहीं थे। 28 जुलाई को नीट प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर दाखिल याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने राज्यों को FIR की जांच जारी रखने की अनुमति दी, लेकिन छात्रों के खिलाफ जबरन कार्रवाई ना करने का निर्देश दिया।

फिर 3 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने 2,700 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड का मुद्दा उठाया। कोर्ट ने साफ किया कि सिर्फ गंभीर और जघन्य अपराधों में शामिल लोगों को ही राहत से बाहर रखा जा सकता है। कोर्ट ने राज्यों को कानून के मुताबिक बाकी मामले बंद करने या वापस लेने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की परमिशन दी।

सूत्रों के मुताबिक,

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दिल्ली, बिहार, यूपी और बंगाल समेत कई राज्यों में प्रदर्शनकारियों पर दर्ज FIR वापस लेने की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद जो लोग हिरासत में लिए गए हैं, वो छोड़ दिए गए हैं।QuoteImage

दिल्ली पुलिस के सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली में प्रदर्शन से जुड़े 13 मामलों में FIR दर्ज हुई थीं। इन सभी मामलों को वापस लेने की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। वहीं, 2,700 से ज्यादा ऐसे लोग हैं, जिनकी स्क्रीनिंग में पुराने आपराधिक रिकॉर्ड होने की जानकारी सामने आई है। इन लोगों के खिलाफ प्रदर्शन से जुड़ी कोई नई FIR दर्ज नहीं की गई है। अगर जांच में किसी के खिलाफ आपराधिक गतिविधि सामने आती है या कोर्ट का आदेश होता है, तो कानून के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी।

CJP का सवाल- अगर अपराधी थे तो प्रदर्शन में कैसे पहुंचे?

CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने पुलिस के दावों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, ‘अगर ये लोग अपराधी थे, तो प्रदर्शन में कैसे पहुंचे। सरकार को ये भी बताना चाहिए कि क्या प्रदर्शन के दौरान इन्होंने तोड़फोड़ की। इसका फुटेज भी सामने लाना चाहिए।’

‘फिलहाल हम लोग IB के एडिशनल डायरेक्टर जनार्दन सिंह के संपर्क में हैं। संगठन की मांग अब भी यही है कि किसी भी प्रदर्शनकारी के खिलाफ कोई कार्रवाई न की जाए। 5 सितंबर को जंतर-मंतर से पुलिस मुख्यालय तक होने वाले मार्च में भी ये मुद्दा उठाया जाएगा। पुलिस की बर्बरता के शिकार लोग भी मार्च में शामिल होंगे।‘

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