
जिले के वनस्थली विद्यापीठ स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में सरसों के समूह अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन कार्यक्रम के तहत एक विशेष प्रशिक्षण और बीज वितरण सत्र का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में केंद्र के प्रभारी बंशीधर चौधरी ने किसानों को सरसों की उन्नत और आधुनिक खेती की तकनीकों से रूबरू कराया। कार्यक्रम के दौरान अनुसंधान निदेशालय, भरतपुर द्वारा विकसित सरसों की उन्नत किस्म ‘बीपीएम-1825’ के बारे में विस्तार से बताया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि यह किस्म सिंचित क्षेत्रों के लिए बेहद उपयुक्त है। इसकी परिपक्वता अवधि 135 से 145 दिन है। औसत उपज 25 से 27 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। इसमें तेल की मात्रा 40.6 प्रतिशत तक पाई जाती है। किसानों को बीज उपचार, खरपतवार नियंत्रण, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, सिंचाई के आधुनिक तरीकों के बारे में भी महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं।

कीट एवं रोग प्रबंधन पर रहा विशेष जोर : केंद्र के पौध संरक्षण विशेषज्ञ एवं तिलहन मिशन के नोडल अधिकारी डॉ. संदीप कुमार चौधरी ने फसल में लगने वाले प्रमुख कीटों और रोगों के नियंत्रण पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि सरसों में माहू (चेपा), पेंटेड बग, आरा मक्खी प्रमुख कीट हैं। अल्टरनेरिया झुलसा, सफेद रोली, तुलासिता, तना गलन प्रमुख रोग हैं। उन्होंने इन सभी के लक्षणों और एकीकृत प्रबंधन के उपायों को विस्तार से समझाया।





