जयपुर, 4 घंटे पहले

चीफ साहब की टीस बार-बार उभर रही है। अब बस 2028 का इंतजार कर रहे हैं। नागौर के सांसद जी खुद को अपने समाज का सबसे बड़ा नेता मानने लगे हैं, शायद इसीलिए सीनियर नेताओं की उम्र का भी लिहाज नहीं। पूर्व विधायक मैडम के एक बुजुर्ग कार्यकर्ता का पुराना वीडियो अब चर्चा में है और मिलिए बाड़मेर के नन्हे कबड्डी किंग से।
राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में…
1. डोटासरा का ‘तौल’ और बीजेपी का ‘बैलेंस’

जो सत्ता में होता है उसकी तूती तो बोलती ही है। शासन-प्रशासन उसी के आदेश पर झुकता है। फिर कुर्सी पर कोई भी बैठा हो, उससे क्या फर्क पड़ता है।
चीफ साहब सारे खेल जानते हैं, लेकिन असल खिलाड़ी वही जो जनता को यकीन दिला दे कि कुर्सी पर बैठा व्यक्ति गलत कर रहा है। ताकि अगली बार जनता कुर्सी सौंपने को तैयार रहे।
निकाय चुनाव खत्म हो गए। रिजल्ट आ गए। मेयर-सभापति ने कार्यभार भी संभाल लिया। लेकिन चीफ साहब की टीस है जो मिटने का नाम नहीं लेती।
जयपुर में उन्होंने पुलिस अधिकारियों के लिए तीखे शब्दों का इस्तेमाल किया। बोले- ये शपथ तो संविधान की लेकर आए थे। लेकिन गली-गली में दुम हिलाते हुए पार्षद ढूंढते फिर रहे थे।
हमारे कुछ लोग पुष्कर में थे। पुलिस आधी रात पहुंच गई। होटल खुलवाया। तब मुझे फोन किया गया। मैंने आला अफसरों को फोन किया। वे बोले- पुलिस देखने गई है कि कहीं कोई परेशानी तो नहीं।
मैंने कहा- हमारी इतनी चिंता। पुलिस होटल में घुसी तो पेड़ के बांधकर पीटेंगे। चाहे मुकदमा हो जाए। जब आप लोग कानून का पालन नहीं कर रहे तो हम मरते क्या न करेंगे?
मैंने हड़काया कि मर जाएंगे, लेकिन दादागिरी नहीं सहेंगे। तब जाकर हमारे लोग 4 दिन आराम से होटल में बैठे रहे।
उन्होंने एक मुहावरा सुनाते हुए भविष्य के लिए अपील कर दी। बोले- एक ने कहा सेठजी पूरा तौलना। सेठ बोला कि हाटड़े (कांटे) पर चढ़ने तो दे भाई। तो जनता इतनी मेहरबानी करे कि 2028 में हमारी सरकार बनवा दे, फिर देखना कि इन्हें किलकारी मारते दिखा देंगे।
चीफ ने नाप तौल और कांटे की खूब बातें की, लेकिन सामने वाले भी बैलेंस बनाने में उस्ताद हैं। शेखावाटी इलाके के सीकर में एक कार्यकर्ता ने चुनाव के दौरान जलवा भी दिखाया था। सिर पर प्लेट में पानी से भरे गिलास रखकर नाचा था।

जयपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा ने पुलिस प्रशासन पर आरोप लगाए। सीकर में डांस करता एक भाजपा कार्यकर्ता।
2. हनुमान बेनीवाल ने उड़ाया मखौल
आदमी कितने ही बड़े पद पर पहुंच जाए। बड़े बोल नहीं बोलने चाहिए। नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल अपने समाज के बड़े नेता हैं, लेकिन अपने ही समाज के सीनियर नेताओं का मखौल उड़ाने से बाज नहीं आए।
अजमेर के रुपनगढ़ में करकेड़ी गांव में समाज का कार्यक्रम था। हनुमान बेनीवाल भी पहुंचे थे। वहां मंच पर उन्होंने ओसियां से पूर्व विधायक दिव्या मदेरणा का मखौल उड़ाया।
बोले- गहलोत ने दिव्या के पिताजी को जेल में डलवाया था। फिर भी जीतने के बाद उन्हीं का साथ दिया और विक्ट्री साइन दिखाया।
उन्होंने कहा- हमने सरकार गिराने की कोशिश की और वे सरकार बचाने में लग गई। फिर क्या हुआ? क्या उनके पिताजी को मुख्यमंत्री बना दिया।
मदेरणा के बाद वे कांग्रेस के सीनियर नेता हेमाराम चौधरी पर आ गए। उन्होंने कहा- पायलट की उम्र 47 है, हेमाराम जी की उम्र 80-85 साल है। फिर भी पायलट साहब के पैरों पर हाथ लगाते हैं। हमें अपने आप पर शर्म नहीं आती?
उन्होंने हेमाराम के लिए कहा- अब क्या करोगे? मरोगे थोड़े दिनों के बाद। फिर आ जाएंगे हम बैठक में सारे के सारे। मैंने 2018 में उनकी मदद की थी। वे रोने लगे। उन्हें रोने की आदत है। बोले- मर गए। मैंने पूछा- क्या करना है। वे बोले- मदद करो। मैंने कर दी मदद। इसके बाद भी वे पायलट साहब-पायलट साहब करते हैं। अरे कौन से पायलट। उनसे वो मामला नहीं संभला, राजस्थान कैसे संभालेंगे? आपको तो पता ही है सारी कहानी।
बयानबाजी के बाद समाज के लोगों में चर्चा है कि हनुमान बेनीवाल बड़े बोल बोलते हैं। रहीम दास जी बरसों पहले कह गए-बड़े बड़ाई न करैं, बड़ो न बोलैं बोल। रहिमन हीरा कब कहै, लाख टका मेरो मोल।

अजमेर में नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने कांग्रेस के सीनियर नेता हेमाराम चौधरी का मखौल उड़ाया।
3. कमांडर कार्यकर्ता
बीते कुछ दिनों से ओसियां से पूर्व विधायक दिव्या मदेरणा छाई हुई हैं। निकाय चुनाव में उनके तीखे तेवर कई बार नजर आए। रिटर्निंग अधिकारी के दफ्तर में धरना हो या फिर मथानिया नगर पालिका में बोर्ड बनाने की कवायद।
पिछले चुनाव में उन्हें ओसियां की जनता ने नकार दिया था, लेकिन उसी दौरान चुनाव प्रचार का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से शेयर किया जा रहा है। वीडियो दिव्या मदेरणा का नहीं बल्कि उनके एक बुजुर्ग समर्थक का है।
दिव्या मदेरणा अपने क्षेत्र में चुनाव प्रचार के दौरान भाषण दे रही थीं। वे बड़े जोश के साथ कह रही थीं- हमारी फौज का हरेक व्यक्ति कमांडर है। सर्वे करने वाले कहते हैं कि दिव्या मदेरणा को कौन टक्कर देगा, उसके कार्यकर्ता खरा सोना है।
ये बातें भीड़ में बैठे बुजुर्ग कार्यकर्ता के दिलो-दिमाग पर असर कर रही थी। वे दिव्या मदेरणा की हर बात पर गौर कर भावुक हो रहे थे। बार-बार गमछे से आंसू पोंछ रहे थे। कमांडर वाली बात पर उनके चेहरे पर कमांडर जैसे भाव आए। ‘कार्यकर्ता खरा सोना’ वाली बात पर उनकी आंखें भर आईं।
जीत-हार अलग बात है, लेकिन ऐसे कार्यकर्ताओं के दम पर नेता की उम्मीदें जिंदा रहती हैं।

ओसियां से पूर्व विधायक दिव्या मदेरणा की सभा का पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर है। जिसमें बुजुर्ग समर्थक भाषण सुनकर भावुक नजर आते हैं।
4. चलते-चलते..
उम्र 9 साल हो, 19 साल हो या फिर 90 साल हो। हर पल को जीने का जुनून होना चाहिए। जीत के लिए ललक होनी चाहिए। हार पर पछतावा होना चाहिए।
चुनाव में नेता हार पर आत्ममंथन करने की जगह दूसरे को कोसने लगते हैं। मशीन में दोष निकालते हैं। दूसरे नेताओं को गालियां देते हैं। प्रशासन पर अंगुली उठाते हैं।
असल काम कभी नहीं होता। हार पर भीतरी छटपटाहट नहीं होती। जब सत्ता मिलती है तो नेता यह सोचकर निश्चिंत हो जाते हैं कि यह हमेशा के लिए है। कई नेता जनता को भूल जाते हैं, उनके काम भूल जाते हैं।
बाड़मेर के लीलसर इलाके का 9 साल बच्चा इन दिनों चर्चा में है। यह बच्चा कबड्डी खेलता है। बच्चे के वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर शेयर किए जा रहे हैं।
बच्चा जब खेल के पाले में होता है तो उसके शरीर का अंग-अंग जीतने की जिद से भरा नजर आता है। उसके हाव-भाव ऐसे कि जैसे अर्जुन को चिड़िया की आंख नजर आती है।
उसके पाले में आने वाले विरोध खिलाड़ी पर सबसे पहले यही बच्चा झपटता है। अपने से बड़े लड़कों को दबोचकर पटक देता है। जीत पर हुंकार सी भरता है। अपना हौसला खुद बढ़ाता है।
जोश, जुनून और जिद इस बच्चे में खेल के दौरान चरम पर दिखती है। जब आउट होकर यह पाले के बाहर बैठता है तब पाले से बाहर होने की उसकी बेचैनी और छटपटाहट भी दर्शनीय लगती है।
बाहर बैठकर वह अपनी टीम का हौसला बढ़ता है, ताकि टीम बेहतर करे और उसे जल्द फिर से पाले में जाने का मौका मिले। छोटू नाम के इस बच्चे से बड़ों को बहुत कुछ सीखना चाहिए।

बाड़मेर के लीलसर इलाके का नन्हा कबड्डी प्लेयर छोटू उर्फ प्रेम।






