
नमस्कार,
आज के जीवन सूत्र में हम बात करेंगे, अपने आहार यानी भोजन की।हमें अपने आहार को लेकर अधिक सावधान रहें। हमारा खाना शुद्ध, संतुलित और मर्यादित होना चाहिए। वह ऋतु और प्रकृति के अनुकूल हो, यही स्वस्थ जीवन का पहला सूत्र है। रोगों से बचने के लिए हमें खाने से जुड़ी 3 बातें हमेशा ध्यान रखनी चाहिए…

पहली बात- अपने आसपास का खाना खाए
संभव हो, तो हमारा भोजन स्थानीय और क्षेत्रीय होना चाहिए। जो अनाज, फल, सब्जियां और खाने-पीने की दूसरी चीजें हमारे आसपास आसानी से मिलती हैं, वे हमारे शरीर और वातावरण दोनों के अनुकूल होती हैं। ऐसा भोजन चुनें, जो हमारे माता-पिता और उनसे पहले की पीढ़ियां खाती आई हैं। हमारे पारंपरिक भोजन में लंबे अनुभव की समझ छिपी होती है, ऐसा भोजन हमें स्वस्थ रहने में मदद करता है।
दूसरी बात- खाने के आकर्षण और उपयोगिता में फर्क समझें
आज तरह-तरह के पकवान, मिष्ठान और विदेशी भोजन हमें आकर्षित करते हैं। स्वाद अच्छा लगना स्वाभाविक है, लेकिन केवल स्वाद के आधार पर भोजन चुनना ठीक नहीं है। हमें यह भी देखना चाहिए कि वह भोजन हमारे शरीर के लिए कितना उपयोगी है। जो भोजन हमारे स्वास्थ्य के लिए उपयोगी है, उसे अपने जीवन में शामिल करना चाहिए।
तीसरी बात- मन पर भी असर डालता है खाना
जिस खाने से हमारा शरीर बनता है, उसका असर हमारे मन पर भी पड़ता है। इसलिए भोजन केवल पेट भरने या स्वाद लेने की चीज नहीं है। यह हमारे शरीर, मन और जीवनशैली को प्रभावित करता है। हम क्या खा रहे हैं, कितना खा रहे हैं और कब खा रहे हैं, इन बातों के संबंध में सतर्क रहना चाहिए।
आज जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद जी गिरि के जीवन सूत्र में जानिए कैसा खाना हमें रोगों से बचाता है?
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