सुप्रीम कोर्ट बोला-अपराधियों में मौत का डर पैदा करना जरूरी:नहीं तो रेप जैसे अपराध रोकना मुश्किल; अदालत ने रेप की 3 घटनाओं पर खुद नोटिस लिया

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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि रेप मामलों में जब तक अपराधियों के मन में यह डर पैदा नहीं होगा कि अगर ऐसा अपराध किया तो मर जाएंगे, तब तक ऐसे अपराधों को रोक नहीं पाएंगे।

दिल्ली-NCR में पिछले दिनों नाबालिगों से गैंगरेप मामले पर कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया था। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से कहा कि हम भारत जैसे देश में हैं। केवल चीजों को कागज पर लिख देना पर्याप्त नहीं है। आपको कार्रवाई करनी होगी।

अगर थोड़ा सख्त या कड़ा होना पड़े तो हिचकिचाएं नहीं। कुछ लोग अनुच्छेद 21 (जीवन के अधिकार) का हवाला देकर हंगामा करेंगे, लेकिन आपको (पुलिस) अपना कर्तव्य निभाना होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-NCR में पिछले दिनों नाबालिगों से गैंगरेप के तीन मामलों पर दिल्ली पुलिस, गृह मंत्रालय से 4 हफ्ते में जवाब मांगा है। रेप की घटनाएं ग्रेटर नोएडा-दिल्ली बस, आस्था कुंज पार्क और स्वरूप नगर में हुईं थीं।

पिछले 2 महीनों की इन 3 घटनाओं पर सुनवाई

4 अगस्त: दिल्ली में 16 साल की नाबालिग से चलती बस में गैंगरेप। पीड़ित ग्रेटर नोएडा के परी चौक से बस में बैठी। आरोपियों ने उसे कश्मीरी गेट पर छोड़ा। इस दौरान बस करीब 47 किमी दौड़ती रही। बस के शीशों पर पर्दे लगे थे।

12 सितंबर: स्वरूप नगर में 16 साल की नाबालिग से गैंगरेप-हत्या। अगले दिन खेत के पास खुले मैदान में शव मिला। चार आरोपी गिरफ्तार हुए, जिनमें तीन नाबालिग हैं।

21 सितंबर: दिल्ली के कालकाजी मंदिर के पास आस्था कुंज पार्क में 17 साल की नाबालिग अपने दोस्त के साथ बैठी थी। तीन युवकों ने फर्जी पुलिस वाले बनकर छात्रा से रेप किया। पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

28 सितंबर: पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट बोला- जवाबदेही तय होनी चाहिए

सुप्रीम कोर्ट ने पिछली सुनवाई में कहा था कि सार्वजनिक जगहों को खराब रोशनी, निगरानी की कमी और पेट्रोलिंग की कमी जैसी वजहों से ‘हाई रिस्क जोन’ नहीं बनने दिया जा सकता। सिर्फ संवेदना जताना समाधान नहीं है, बल्कि अपराध रोकने की जिम्मेदारी जिन अधिकारियों पर है, उनकी जवाबदेही तय होनी चाहिए।

आस्था कुंज पार्क की घटना का जिक्र करते हुए कोर्ट ने कहा कि LSR कॉलेज की छात्राओं ने पहले भी यौन उत्पीड़न की शिकायत की थी, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था में जरूरी सुधार नहीं किए गए।

दिल्ली में हर दिन बच्चों से यौन अपराध के 4 मामले

NCRB के मुताबिक, 2024 में दिल्ली में POCSO के 1,553 केस दर्ज हुए। यानी औसतन हर दिन 4 से ज्यादा मामले सामने आए। 2025 की रिपोर्ट अभी जारी नहीं हुई है।

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