निकाय चुनाव से पहले दैनिक भास्कर न्यूज एप पर शुरू किए गए ‘शहरी सरकार रेटिंग सर्वे’ को लेकर निवाई शहरवासियों में उत्साह देखने को मिल रहा है। शहर के लोग सर्वे में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेकर पालिकाध्यक्ष के कामकाज और शहर में हुए विकास कार्यों को लेकर अपनी राय दर्ज करा रहे हैं।
सर्वे में शामिल होने के लिए इस लाइन पर क्लिक करें। आप सिर्फ दैनिक भास्कर न्यूज एप के जरिए इस सर्वे में शामिल हो सकते हैं।

सर्वे के जरिए यह जानने की कोशिश की जा रही है कि शहरवासी अपने जनप्रतिनिधि के कामकाज और स्थानीय व्यवस्थाओं से कितने संतुष्ट हैं। सर्वे में शहरवासी पालिकाध्यक्ष को 1 से 5 तक रेटिंग दे रहे हैं। इसके लिए शहर से जुड़े पांच प्रमुख मुद्दे शामिल किए गए हैं। इनमें सफाई व्यवस्था, सड़क, रोड लाइट, सीवरेज और बेसहारा पशु शामिल हैं।
‘पहली बार शहर के मुद्दों पर सीधे राय देने का मौका’
शहरवासियों का कहना है कि यह पहली बार है जब उन्हें शहर के मुद्दों पर सीधे अपनी राय देने का अवसर मिल रहा है। आमतौर पर जनप्रतिनिधियों के कामकाज पर चर्चा केवल चुनाव के दौरान होती है। इस सर्वे के जरिए उन्हें शहर की व्यवस्थाओं और प्रमुख समस्याओं पर अपनी राय व्यक्त करने के साथ ही पालिकाध्यक्ष को रेटिंग देने का मौका मिल रहा है।
लोगों का मानना है कि सर्वे के परिणाम से यह स्पष्ट होगा कि शहर की जनता स्थानीय विकास कार्यों और व्यवस्थाओं को किस दृष्टिकोण से देखती है। सफाई, सड़क, रोड लाइट, सीवरेज और बेसहारा पशु जैसे मुद्दे सीधे आमजन के दैनिक जीवन से जुड़े हैं। यह सर्वे महिलाओं सहित शहर के विभिन्न वर्गों को अपनी राय व्यक्त करने का अवसर प्रदान कर रहा है।
‘पहले विधानसभा चुनाव में ही ऐसे सर्वे देखने को मिलते थे’
शहरवासी दयाशंकर गुर्जर ने बताया कि पहले ऐसे सर्वे और रेटिंग केवल विधानसभा चुनावों के दौरान देखने को मिलते थे, जब नेता और चुनावी मुद्दे चर्चा में रहते थे। उन्होंने कहा कि निकाय चुनाव से पहले पालिकाध्यक्ष के कामकाज पर जनता की राय जानने के लिए शुरू किया गया यह सर्वे स्थानीय जनप्रतिनिधि के कार्यों का मूल्यांकन करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।
बेबाक राय देने का अवसर मिलेगा सर्वे से लोगों को अपनी बेबाक राय देने का अवसर मिलेगा। इस सर्वे से सामने आएगा कि जिन समस्याओं का वे रोजाना सामना करते हैं, उन पर चुने हुए जनप्रतिनिधि कितना ध्यान देते हैं और क्या उनका समाधान भी करते हैं? इससे जनप्रतिनिधियों को भी अपनी जिम्मेदारी का एहसास होगा और वे भविष्य में अधिक पारदर्शिता के साथ काम करेंगे।






