
राज राजेश्वरी मां चौथ माता और त्रिनेत्र गणेश जी की 18वीं वार्षिक पदयात्रा गुरुवार को पीपलू कस्बे से शुरू हुई। इस दौरान पूरा कस्बा भक्तिमय माहौल में रंग गया। पदयात्री हाथों में ध्वज थामे और नंगे पांव चल रहे थे।

यात्रा शुरू होने से पहले कस्बे के कुट वाले बालाजी मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की गई। मंदिर के पुजारी राधेश्याम वैष्णव ने मंत्रोच्चारण के साथ कुट वाले बालाजी, चौथ माता, त्रिनेत्र गणेश जी की मूर्तियों, पदयात्रा रथ और मुख्य ध्वज की पूजा करवाई।
इसके बाद श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से महाआरती कर यात्रा की सफलता की कामना की।
पूजा के बाद ढोल-नगाड़ों और माता रानी के जयकारों के साथ पदयात्रा रवाना हुई। यह यात्रा रानोली रोड, बस स्टैंड और घाणा चौराहा से होकर गंतव्य की ओर बढ़ी।
इस दौरान कस्बे में जगह-जगह ग्रामीणों और व्यापारियों ने पदयात्रियों पर फूल बरसाकर उनका स्वागत किया। उन्होंने अल्पाहार और पीने के पानी का भी इंतजाम किया।
पदयात्रा समिति के रामप्रसाद जांगिड़ और श्रवण साहू ने यात्रा के पड़ाव की जानकारी दी। यात्रा का पहला रात्रि विश्राम धार्मिक स्थल शिवाड़ में रहेगा।
दूसरे दिन शुक्रवार को चौथ का बरवाड़ा स्थित धर्मशाला में विश्राम किया जाएगा। तीसरे और आखिरी दिन पदयात्री सवाई माधोपुर के शेरपुर (शेरगढ़) में रुकेंगे।
इसके बाद पदयात्रा मुख्य दरबार पहुंचकर माता जी और त्रिनेत्र गणेश जी के दर्शन करेगी। वहां विधिवत ध्वज चढ़ाया जाएगा और यात्रा खत्म होगी।
यात्रा में जितेंद्र वैष्णव, चंद्रप्रकाश, नानकराम, सीताराम जांगिड़, भंवरलाल सेन, लोकेश साहू, हेमराज गुर्जर समेत कई महिला और पुरुष श्रद्धालु शामिल हुए।






