
नीम करौली बाबा पर बनी फिल्म हनुमान अंश 100 करोड़ रुपए से ज्यादा की कमाई कर चुकी है। लेकिन जिस घर में नीम करौली बाबा का बचपन बीता, अब परिवार और ट्रस्ट के बीच विवाद की वजह बन गया है। बाबा की 6 पोतियों ने डीएम को शिकायत देकर ट्रस्ट के सचिव संजय गुप्ता पर कब्जा करने का आरोप लगाया है।
दूसरी तरफ, यूपी सरकार वहां नीम करौली बाबा से जुड़ा कॉरिडोर बनाने की तैयारी कर रही है। ऐसे में बाबा की विरासत से जुड़ी संपत्तियों के अधिकार और उनके प्रबंधन को लेकर उठे सवाल अहम हो जाते हैं।

आखिर बाबा के पुश्तैनी घर का मालिकाना हक किसके पास है? पोतियों ने कब्जे का आरोप क्यों लगाया? पढ़िए पूरी रिपोर्ट…
पहले जानिए पूरा विवाद क्या है…
नीम करौरी बाबा को नीम करौली बाबा के नाम से भी जाना जाता है। उनका जन्म फिरोजाबाद से करीब 15 किलोमीटर दूर अकबरपुर गांव में हुआ था। इसी ग्राम पंचायत का मकान नंबर 154-व बाबा का पुश्तैनी घर है। इसका रख-रखाव श्री ठाकुर हनुमान ट्रस्ट करता है। पैतृक घर में नीम करौली बाबा का ध्यान कक्ष, भोजनालय, अतिथि कक्ष और शयन कक्ष बना है। इसी को लेकर विवाद है। बाबा की 6 पोतियों की तरफ से डीएम को सौंपे शिकायती पत्र में ट्रस्ट के सचिव संजय गुप्ता पर संपत्ति पर कब्जा करने का आरोप लगाया गया है।
दरअसल, नीम करौली बाबा गृहस्थ संत थे। उनके दो बेटे और एक बेटी थी। बड़े बेटे अनेक शर्मा के एक बेटे हैं। उनका नाम धनंजय शर्मा है। वे फिरोजाबाद में ही रहते हैं। जबकि छोटे बेटे धर्म नारायण शर्मा की 6 बेटियां हैं। इन लोगों ने ही कब्जे की शिकायत की है। बाबा की बेटी गिरिजा भटेले आगरा में रहती हैं।

तस्वीर में नीम करौली बाबा के दोनों बेटे और बेटी (कुर्सियों पर) के साथ पोतियां (पीछे खड़ी) भी नजर आ रही हैं।
बाबा के पोते बोले- बहनों के पति विवाद करवा रहे
पूरे विवाद पर हमने नीम करौली बाबा के पोते धनंजय शर्मा से बात की। वह कहते हैं, ‘जब यह मंदिर बनाया गया था, तब पिताजी और चाचाजी ने कहा था कि हमारे जाने के बाद मकान ट्रस्ट को दे देना। उस वक्त कोई लिखा-पढ़ी नहीं हुई थी। इसलिए कोई प्रमाण नहीं है। वो मकान सिर्फ 450 स्क्वेयर फीट में बना है। कोई करोड़ों की संपत्ति नहीं है। महाराज जी का नाम इतना बड़ा है, इस तरह के विवाद से सिर्फ उनका नाम ही खराब होगा।’
धनंजय बताते हैं- यूपी पर्यटन विभाग गांव में 5 हेक्टेयर जमीन पर कॉरिडोर बनाने की तैयारी कर रहा है। जमीन भी चिह्नित हो गई है। इसे कैंची धाम की तरह डेवलप किया जाएगा। लेकिन इस पर विवाद शुरू कर दिया गया, कब्जा कहा जा रहा है। जबकि, कब्जा तब होता जब परिवार से बाहर का कोई आदमी कब्जा करता और घर खाली न करता। लेकिन, यहां ट्रस्ट सारा रखरखाव करता है।
धनंजय का कहना है- ‘14 अगस्त को सभी बहनें चाचीजी यानी अपनी मां की पुण्यतिथि पर गांव आई थीं। तब किसी तरह के विवाद की बात नहीं हुई। सभी ने उसी घर में बैठकर खाना खाया। बाद में डीएम साहब को शिकायत दी गई। ये सब बहनें नहीं, बल्कि उनके पति कर रहे हैं। इसमें भी मनोज रावत सबसे आगे हैं। मुझे अजीब लगता है कि डीएम साहब ने इनका पत्र ले क्यों लिया? यहां तो कोई विवाद ही नहीं है। बुआ तो पहले से ही ट्रस्ट की अध्यक्ष हैं।’

बाबा नीम करौली की जन्मस्थली फिरोजाबाद रेलवे स्टेशन से करीब 15-16 किमी दूर है। आगरा से इसकी दूरी लगभग 20 किमी है।
अब बाबा की पोतियों का पक्ष जान लीजिए…
बाबा की 6 पोतियां सुनीता शर्मा, अर्चना शर्मा, वंदना शर्मा, भावना रावत, ऋतु तिवारी और ऋचा रावत हैं। धनंजय शर्मा ने जिन मनोज रावत का नाम लिया, वे भावना रावत के पति हैं और आगरा में रहते हैंं। इस मामले में वही डीएम को कागज उपलब्ध करवा रहे हैं। हमने उनसे बात की। उन्हें बताया कि धनंजय का कहना है, शिकायत से बाबा का नाम खराब हो रहा है। इस पर मनोज कहते हैं, ‘मैं भी यह बात समझता हूं, लेकिन हर चीज की एक लिमिट होती है। जब पानी सिर के ऊपर निकल गया, तब हमें यह करना पड़ा।’
मनोज कहते हैं- ‘यह जमीन नहीं, भावनाओं का मामला है। वो हमारी प्रॉपर्टी है। हमें ही वहां घुसने न दिया जाए, यह ठीक बात नहीं। हमने 7 सितंबर को डीएम साहब को संपत्ति से जुड़े कागज दिए हैं। महाराजजी का नाम घरौनी में दर्ज है। उनके बाद बेटों और फिर उनकी बेटियों का नाम दर्ज होना चाहिए। हमने परिवार रजिस्टर भी डीएम साहब को दिया है।’
ट्रस्ट के अधिकार पर मनोज बिना किसी का नाम लिए कहते हैं- ‘किसी एक व्यक्ति के पास अधिकार होते हैं तो गड़बड़ी होती है। उसे लगता है कि वही सब कुछ है। हम चाहते हैं कि ट्रस्ट भंग करके सरकार अपने स्तर पर एक ट्रस्ट बनाए। इसमें फिरोजाबाद के डीएम पदेन अध्यक्ष, टूंडला के तहसीलदार और एक अन्य अधिकारी हो। अकबरपुर के अन्य लोग भी हों। ऐसा होने से ये अधिकारी लगातार बदलते रहेंगे। किसी के अंदर परमानेंट वाली सोच नहीं आएगी।’

ट्रस्ट बोला- जबरदस्ती का विवाद बनाया गया
बाबा की पत्नी रामबेटी ने ही साल 1996 में श्री ठाकुर हनुमानजी ट्रस्ट बनाया था। अभी बाबा की बेटी गिरिजा भटेले इसकी अध्यक्ष हैं। 17 अन्य लोग भी इस ट्रस्ट में हैं। यह ट्रस्ट पूरे देश में बाबा से जुड़ी संपत्तियों का रखरखाव करता है।
पूरे मामले में हमने ट्रस्ट के एक पदाधिकारी से बात की। उन्होंने नाम न छापने की शर्त पर कहा- अभी तक कभी भी ट्रस्ट में किसी तरह का विवाद नहीं हुआ। आगे भी विवाद की संभावना नहीं है। ये जबरदस्ती का विवाद बनाया गया है। सत्य की जीत होती है। विवाद करने वाले लोग खुद शांत हो जाएंगे।
सरकार नीम करौली कॉरिडोर बना रही
नीम करौली बाबा की जन्मभूमि पर पर्यटन विभाग का विशेष फोकस है। यहां करीब 9 करोड़ की लागत से आधुनिक कन्वेंशन सेंटर भी बन रहा है। इसमें मल्टी पर्पज हॉल, सांस्कृतिक ब्लॉक और एक आधुनिक एग्जीबिशन हॉल बनाया जा रहा है। एग्जीबिशन हॉल में नीम करौली बाबा से जुड़ी चीजें रखी जाएंगी।
पिछले दिनों यूपी के पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह फिरोजाबाद गए थे। तब उन्होंने कहा था कि हम इस इलाके को धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित कर रहे हैं। इससे स्थानीय रोजगार और आर्थिक गतिविधियां भी बढ़ेंगी। हमारी कोशिश है कि यहां आने वाले हर व्यक्ति को सुगम कनेक्टिविटी, आधुनिक सुविधाएं और आध्यात्मिक अनुभव मिले।







