
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को लेकर ओमान को बमबारी की धमकी दी है। फॉक्स न्यूज के मुताबिक, ट्रम्प ने कहा कि अगर ओमान अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत में बाधा बना, तो अमेरिका उस पर ‘बमबारी करेगा’।
रिपोर्ट के मुताबिक, सोमवार को फोन पर हुई बातचीत में ट्रम्प ने यह धमकी दी। हालांकि, ट्रम्प ने यह नहीं बताया कि ओमान ने ऐसा क्या किया था जिसे वह रुकावट मान रहे हैं।
ट्रम्प ने यह भी दावा किया कि अमेरिका का ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के साथ सीक्रेट बातचीत जारी है। हालांकि, IRGC ने कुछ देर बाद ही ट्रम्प के इस दावे को खारिज कर दिया और कहा कि अमेरिका के साथ उसकी कोई बातचीत नहीं हो रही है।
अमेरिका-ईरान की बातचीत में ओमान मध्यस्थ देश
ओमान लंबे समय से खुद को इस संघर्ष में तटस्थ देश बताता रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में भी वह मध्यस्थ की भूमिका निभाता रहा है।
युद्ध शुरू होने के बाद ईरान की ओर से ओमान पर कई हमले हुए, लेकिन इसके बावजूद दोनों देशों के बीच बातचीत कराने में उसकी भूमिका बनी रही।
ट्रम्प का बयान इसलिए भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि यह पहली बार है जब उन्होंने मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे ओमान को सीधे सैन्य कार्रवाई की धमकी दी है।
होर्मुज स्ट्रेट पर टिकी है पूरी बातचीत
ओमान इस समय होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने के मुद्दे पर अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में अहम भूमिका निभा रहा है।
युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही काफी हद तक रोक रखी है। दुनिया 20% कच्चा तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस इसी रास्ते से गुजरता है। इसलिए इस समुद्री मार्ग को दोबारा खोलना दोनों देशों के बीच सबसे बड़ा मुद्दा बन गया है।

ईरान बोला- जहाजों के रास्ते पर समझ बनी
ट्रम्प की धमकी से कुछ घंटे पहले ईरान ने दावा किया था कि होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच समझ बन गई है।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघई ने सोमवार को तेहरान में पत्रकारों से कहा कि दोनों पक्ष जहाजों के आने-जाने के रास्ते पर सहमत हो गए हैं। अब सिर्फ बाकी तकनीकी और प्रशासनिक विवरण तय किए जाने हैं, जिसके बाद संयुक्त बयान जारी किया जाएगा।
IRGC ने ट्रम्प के दावे को झूठ बताया
ट्रम्प के इस दावे को ईरान की अर्ध-सरकारी न्यूज एजेंसी तस्नीम न्यूज के हवाले से IRGC ने खारिज कर दिया।
IRGC के एक प्रवक्ता ने कहा कि उसके अधिकारियों और अमेरिका के बीच किसी तरह की बातचीत नहीं हो रही है। उन्होंने ट्रम्प के बयान को झूठ बताते हुए कहा कि यह युद्ध में हार और निराशा से पैदा हुई उनकी कल्पना है।
IRGC ईरान की सबसे प्रभावशाली सैन्य संस्थाओं में से एक है। देश की सुरक्षा, राजनीति और अर्थव्यवस्था में भी उसकी अहम भूमिका मानी जाती है।
होर्मुज स्ट्रेट खोलने के बदले मुआवजा चाहता है ईरान
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची इस महीने की शुरुआत में कह चुके हैं कि होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह खोलने का फैसला इस बात पर निर्भर करेगा कि अमेरिका ईरान को मुआवजा देता है या नहीं।
ईरान का आरोप है कि अमेरिका ने दोनों देशों के बीच हुए मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) का उल्लंघन किया है।
रॉयटर्स ने पहले एक ईरानी अधिकारी के हवाले से बताया था कि ईरान चाहता है कि होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों के माल की कीमत का 5 से 7% शुल्क लिया जाए।

ट्रम्प बोले- युद्ध खत्म करने की कोई जल्दी नहीं
फॉक्स न्यूज से बातचीत में ट्रम्प ने कहा कि उन्हें ईरान के साथ युद्ध खत्म करने की कोई जल्दी नहीं है।
उन्होंने ईरान की तुलना अच्छे पोकर खिलाड़ी से करते हुए कहा कि ईरान के लोग अच्छे खिलाड़ी हैं, लेकिन वे मर रहे हैं।
ट्रम्प ने कहा कि उनकी कोई समय सीमा तय नहीं है। नवंबर में होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों का भी उनके फैसलों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
उन्होंने अमेरिका के हथियारों के भंडार को लेकर उठ रही चिंताओं को भी खारिज करते हुए कहा कि इस्तेमाल किए गए हथियार उसकी कुल सैन्य क्षमता के मुकाबले बहुत कम हैं।
अमेरिका-ईरान के बीच 60 दिन का MoU आज खत्म हो रहा
अमेरिका और ईरान के बीच 18 जून को हुआ 60 दिन का एमओयू 17 अगस्त को खत्म हो रहा है। इसका मकसद दोनों देशों के बीच बातचीत जारी रखना और स्थायी समझौते तक पहुंचना था।
हालांकि, दोनों देशों ने बाद में एक-दूसरे पर फिर हमले शुरू कर दिए और 8 जुलाई को ट्रम्प ने युद्धविराम खत्म होने का ऐलान कर दिया।
अब MoU की अवधि पूरी होने के बीच दोनों देशों के बीच बातचीत का सबसे अहम मुद्दा फिर से होर्मुज स्ट्रेट को खोलना बना हुआ है।
ट्रम्प ने फिर दोहराया- ईरान को परमाणु हथियार नहीं बनाने देंगे
MoU की अवधि खत्म होने से पहले ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर कहा कि उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता यही रहेगी कि ईरान किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार हासिल न कर सके।
यानी एक तरफ अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत जारी है, वहीं दूसरी तरफ ट्रम्प ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अपना सख्त रुख भी बनाए हुए हैं।





