गैंगस्टर-लॉरेंस से मिलने के लिए 20-दिन भूखे रहे थे कैदी:हाई सिक्योरिटी जेल में ब्रांडेड कपड़े पहनते हैं खूंखार क्रिमिनल, गर्लफ्रेंड से भी बात करते हैं

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‘जेल में ब्रांडेड कफन’…इस किताब को लिखने वाला न कोई लेखक है, न वकील। केवल 8वीं पास है और वर्तमान में अजमेर हाई सिक्सोरिटी जेल का कैदी है। नाम है– योगेश चारणवासी, जो मलसीसर, झुंझुनूं का रहने वाला है।

कैदी ने किताब में हाई सिक्योरिटी जेल पर सवाल खड़ा किया है। किताब में लिखा है कि इन जेलों में बड़े गैंगस्टरों का रुतबा चलता है। उनके लिए ब्राडंड कपड़ों से लेकर शूज तक आते हैं। उनके इशारों पर बाहर बड़े-बड़े मर्डर और अपराध करवाए जाते हैं।

किताब में लिखा है- लॉरेंस ने जमानत पर छूट रहे अपने भाई अनमोल, साथी रोहित गोदारा और सचिन थापन को समझा दिया था कि बाहर जाकर क्या करना है। तीनों ने जेल से बाहर जाकर इतना क्राइम किया कि सिद्धू मूसेवाला जैसा हत्याकांड हो गया और रोहित गोदारा विदेश में जाकर बैठ गया।

कैदी योगेश राजस्थान, हरियाणा और उत्तरप्रदेश की जेलों में बंद रहा है। उसने अपने अनुभवों को किताब में लिखा है। किताब में मुख्य रूप से इन बातों का जिक्र है-

  1. गैंगस्टर लॉरेंस से मिलने के लिए कैदियों की भूख हड़ताल।
  2. सलाखों के पीछे से गर्लफ्रेंड से बात।
  3. जेल प्रहरी की मदद से कैदियों तक मोबाइल पहुंचना।
  4. कैदियों के पास ब्रांडेड कपड़े और जूते।
  5. हाई सिक्योरिटी जेल में पोस्टिंग से डरते पुलिसकर्मी।

1. कैदी नहीं, ‘ब्रांडेड’ बदमाश

किताब में अजमेर हाई सिक्सोरिटी जेल के अंदर कैदियों की ब्रांडेड जीवनशैली के बारे में लिखा गया है। कैदियों के एडिडास के कपड़े और जूतों की बात लिखी हैं।

लिखा है- जेल में बंद होने के बाद भी कैदियों की ब्रांडेड चीजें उनके ऊंचे रुतबे का हिस्सा बनी रहती हैं। अपराधी जेल में भी यह दिखाना चाहता है कि वह सामान्य कैदी नहीं है। कपड़े से लेकर बातचीत तक उसका ‘स्टेटस’ अलग है।

2. कोर्ट में पेशी के लिए ‘वीआईपी मूवमेंट’

किताब में हाई सिक्योरिटी बंदियों को कोर्ट ले जाने की सुरक्षा का भी जिक्र है। लिखा है- ऐसे कैदियों को जेल से बाहर निकालना सामान्य बंदी को ले जाने जैसा नहीं होता।

भारी एस्कॉर्ट, हथियारबंद जवान और अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था के बीच पेशी कराई जाती है। यह भी गैंगस्टर के रुतबे की एक तस्वीर है। जेल के अंदर बंद, लेकिन जेल से बाहर निकलते ही पूरा सुरक्षा घेरा उनके साथ होता है।

3. लॉरेंस को उसके भाई से मिलाने कैदियों ने की भूख हड़ताल

अजमेर हाई सिक्सोरिटी जेल में 2021 में गैंगस्टर लॉरेंस बंद था। किताब में लिखा है- तत्कालीन जेल अधीक्षक प्रीति चौधरी के समय लॉरेंस को हाई सिक्योरिटी जेल के वार्ड नंबर-3 में रखा गया था।

उसके लिए सामान्य कैदियों से अलग व्यवस्था थी। उसके लिए 12 से 15 प्रहरियों की ड्यूटी और वार्ड इंचार्ज लगाए गए थे। पपला गुर्जर भी उसके वार्ड में था।

किताब के अनुसार- जेल में लॉरेंस का भाई अनमोल के अलावा सचिन थापन, रोहित गोदारा, देवेन्द्रपाल उर्फ गट्ट बन्ना, जीतू बन्ना, दलीप फोगा, योगेश चारणवासी, दीपक पहल सोनीपत और हरियाणा के विनोद सूरा जागसी समेत कई कैदी भी थे।

वे लॉरेंस से मिलना चाहते थे लेकिन जेल प्रशासन की सख्ती के कारण वे नहीं मिला पा रहे थे। ऐसे में मांगीलाल नोखड़ा के कहने पर इन कैदियों ने भूख हड़ताल शुरू कर दी।

कैदियों की मांग थी- लॉरेंस को उसके भाई अनमोल और साथियों से मिलने दिया जाए। भूख हड़ताल 20 दिन तक चली। आखिरकार दबाव के बाद जेल प्रशासन को झुकना पड़ा। इसके बाद इन गैंगस्टरों को एक ही वार्ड में बंद कर दिया गया।

4. आनंदपाल-लॉरेंस गैंग का नेटवर्क जेल से बाहर तक

किताब में हाई सिक्योरिटी जेलों के अंदर गैंगस्टरों के रिश्तों के बारे में भी लिखा गया है। लेखक कैदी ने देवेन्द्रपाल उर्फ गट्ट बन्ना को आनंदपाल का मुंहबोला भाई बताया है।

वहीं मांगीलाल नोखड़ा के लिए लिखा है कि लॉरेंस उसे अपना बड़ा भाई मानता था। जेल में बने इन रिश्तों ने अपराध की बाहरी दुनिया तक अपना असर डाला। ये नेटवर्क जेल प्रशासन की बड़ी चिंता थी।

5. जेल में बंद कैदी की मोबाइल से गर्लफ्रेंड से बात

वर्तमान में राजस्थान की बड़ी हाई सिक्योरिटी जेलों में मोबाइल पहुंचने की घटना आम हो गई है। किताब में इसका भी जिक्र किया गया है। किताब में एक जेल प्रहरी पर आरोप लगाया है कि वह एक लाख रुपए लेकर कैदियों तक मोबाइल पहुंचाता था।

बंदी इन प्रहरियों से मोबाइल मंगवाकर फिरौती और अन्य क्राइम करते हैं। फोन से परिवार, परिचितों और बाहर के लोगों से संपर्क चलता है। कैदी का अपनी गर्लफ्रेंड से रात में बातचीत तक भी जिक्र है।

6. कैदियों से डरते जेल प्रहरी और अधिकारी

किताब के अनुसार- जेल प्रहरी भी दो तरह के होते है। सभी प्रहरी गलत नहीं होते, लेकिन कुछ कर्मचारी बदमाशों के पैसे, दबाव और प्रभाव के आगे कमजोर पड़ जाते हैं।

दावा है कि बदमाश सिर्फ पैसे से नहीं, अपने नाम और प्रभाव से भी काम करवाते हैं। प्रहरी को डर रहता है कि कहीं कैदियों से टकराव आगे उनके लिए मुश्किल न खड़ी कर दे। जेल प्रहरी फूंक-फूंककर कदम रखते हैं।

अधिकारी भी इस बात से डरते हैं कि कहीं उनकी ड्यूटी हाई सिक्योरिटी जेल में न लग जाए। उसके शब्दों में यहां ड्यूटी लगना ऐसा है जैसे प्रशासन का ‘राम रूठ गया हो’।

15 से ज्यादा मामले दर्ज

कैदी योगेश चारणवासी 2020 से अजमेर हाईसिक्योरिटी जेल में बंद है। इस राजस्थान, हरियाणा समेत अलग-अलग राज्यों में 15 से ज्यादा धोखाधड़ी, आर्म्स एक्ट और जेल से फरार होने के मुकदमें दर्ज हैं।

अपराध की दुनिया में 2008 में आया था, जब लूट की वारदात की थी। अजमेर जेल में रहकर ही इस किताब को लिखा। जनवरी 2026 में ऑनलाइन पब्लिश हुई थी।

हाई सिक्योरिटी जेल के हाल ही के बड़े घटनाक्रम

1. डकैत जगन गुर्जर हत्याकांड: 29 जून 2026 को अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में सोमवार को डकैत जगन गुर्जर की हत्या हो गई थी। भरतपुर के कुलदीप जघीना हत्याकांड के आरोपी विष्णु ने जगन गुर्जर की टॉवल (तौलिए) से गला दबाकर मर्डर किया था। हार्डकोर बंदी विष्णु और जगन गुर्जर बैरक नंबर 5 में बंद थे। पूरी खबर पढ़िए…

2. विदेशों में बैठे गैंगस्टर गार्ड करता था बात: जयपुर पुलिस ने 11 अगस्त 2026 को अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल के प्रहरी (गार्ड) को गिरफ्तार किया है। जो अवैध वसूली करने वाली गैंग के लिए काम कर रहा था। जेल में बंद गैंग के सदस्यों को सुविधाएं पहुंचा रहा था।

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