अमेरिका में AI को लेकर तीन खेमे:मस्क को सभ्यता मिटने का डर, ट्रम्प को चीन से पिछड़ने की चिंता, तीसरा पक्ष इंसानी कंट्रोल चाहता

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अमेरिका में AI के विकास की रफ्तार को लेकर बहस तेज है। इसे लेकर तीन अलग-अलग खेमे बन गए हैं।

इलॉन मस्क समेत कुछ टेक दिग्गजों को डर है कि AI अगर इंसानों के कंट्रोल से बाहर हुआ तो पूरी मानव सभ्यता के लिए खतरा बन सकता है। वे इसे परमाणु हथियार से भी ज्यादा खतरनाक मानते हैं।

वहीं, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प AI की रफ्तार धीमी करने के पक्ष में नहीं हैं। उनका जोर अमेरिका को AI की दौड़ में चीन से आगे रखने पर है। उनका मानना है कि ज्यादा रोक-टोक से अमेरिका पीछे रह सकता है।

तीसरा खेमा AI को लेकर बीच का रास्ता चाहता है। वह इसकी रफ्तार रोकने के बजाय सुरक्षा नियम और इंसानी निगरानी बनाए रखने के पक्ष में है।

नेताओं से लेकर टेक दिग्गजों तक अलग-अलग राय

AI को लेकर अमेरिका में छिड़ी यह बहस अब टेक कंपनियों से निकलकर राजनीति के केंद्र में पहुंच गई है।

दिलचस्प बात यह है कि इस मुद्दे पर वामपंथी और दक्षिणपंथी, दोनों तरफ के कुछ नेता AI को लेकर चिंता जता रहे हैं। आम तौर पर एक-दूसरे से अलग रहने वाले इन दोनों खेमों में बहुत कम मुद्दों पर सहमति दिखती है।

लेकिन AI की यह बहस सिर्फ राजनीति या टेक कंपनियों तक सीमित नहीं है। आने वाले समय में इसके फैसले हमारी नौकरी, पढ़ाई, कारोबार और रोजमर्रा की जिंदगी को भी प्रभावित कर सकते हैं।

साथ ही, यह भी तय होगा कि AI के इस्तेमाल को लेकर नियम कैसे बनाए जाएंगे।

AI का विकास धीमा करने के पक्ष में…

डारियो अमोडेई

AI कंपनी एंथ्रोपिक के को-फाउंडर और CEO हैं। उन्होंने 2021 में OpenAI छोड़कर एंथ्रोपिक शुरू की थी। कंपनी ने खुद को AI की सुरक्षा पर ज्यादा ध्यान देने वाली कंपनी के तौर पर पेश किया है।

अमोडेई कई बार चेतावनी दे चुके हैं कि भविष्य की AI बेहद खतरनाक हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा है कि इसका इस्तेमाल जैविक हथियार बनाने जैसे खतरनाक कामों में हो सकता है।

वे लंबे समय से AI पर सरकारी नियम बनाने की मांग करते रहे हैं। हाल ही में उन्होंने 3,800 शब्दों का एक लेख लिखकर दुनियाभर में AI के विकास की रफ्तार धीमी करने का प्रस्ताव रखा है।

न्यूयॉर्क में मई में फाइनेंशियल सर्विसेज पर एंथ्रोपिक की ब्रीफिंग में डारियो अमोडेई।

न्यूयॉर्क में मई में फाइनेंशियल सर्विसेज पर एंथ्रोपिक की ब्रीफिंग में डारियो अमोडेई।

रुख बदलने वाले…

सैम ऑल्टमैन

OpenAI के को-फाउंडर और CEO हैं। 2023 में उन्होंने AI से इंसानों के खत्म होने के खतरे की चेतावनी वाले बयान पर हस्ताक्षर किए थे। इसी साल उन्होंने अमेरिकी सीनेट में ताकतवर AI मॉडल पर नियम बनाने का समर्थन भी किया।

बाद में उनका रुख कुछ नरम पड़ा। 2025 के बीच तक ऑल्टमैन का कहना था कि AI में बड़े बदलाव धीरे-धीरे होंगे और उन्हें संभालना संभव है।

फिर जुलाई 2026 में OpenAI ने बताया कि उसके दो AI मॉडल टेस्टिंग के दौरान बिना इंसानी मदद के सिस्टम से बाहर निकल गए। उन्होंने चोरी की लॉगिन डिटेल्स और सिक्योरिटी खामी का इस्तेमाल कर Hugging Face के सर्वर तक पहुंच बनाई।

इस घटना के बाद ऑल्टमैन ने कहा कि अब AI के विकास की रफ्तार धीमी करने का समय आ गया है। उन्होंने अमोडेई की इस मांग का भी समर्थन किया कि AI मॉडल का विकास कुछ धीमा किया जाना चाहिए।

सैम ऑल्टमैन ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स डीलबुक समिट’ में AI को लेकर अपनी बात रखते हुए। फोटो- दिसंबर 2024

सैम ऑल्टमैन ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स डीलबुक समिट’ में AI को लेकर अपनी बात रखते हुए। फोटो- दिसंबर 2024

इलॉन मस्क

लंबे समय से AI के खतरों को लेकर चेतावनी देते रहे हैं। उनका अनुमान है कि AI के इंसानों के लिए खतरनाक साबित होने की संभावना 10 से 20% तक है। उन्होंने AI को परमाणु हथियारों से भी ज्यादा खतरनाक बताया है और समय रहते इसके लिए नियम बनाने की मांग की है।

मस्क ने खुद AI कंपनी xAI शुरू की है और ट्रम्प के चुनाव अभियान में बड़ी रकम दी थी। ट्रम्प प्रशासन में वह कुछ समय तक सरकारी नियमों में बदलाव से जुड़े काम से भी जुड़े रहे। इसके बावजूद शनिवार को उन्होंने अमोडेई की AI विकास धीमा करने की मांग का समर्थन किया। सोशल मीडिया पर मस्क ने लिखा, “डारियो सही हैं।”

इलॉन मस्क ने 2024 में एक चुनावी कार्यक्रम के दौरान रिपब्लिकन राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रम्प का समर्थन करते हुए। यह तस्वीर 5 अक्टूबर 2024 की है।

इलॉन मस्क ने 2024 में एक चुनावी कार्यक्रम के दौरान रिपब्लिकन राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रम्प का समर्थन करते हुए। यह तस्वीर 5 अक्टूबर 2024 की है।

AI पर बीच का रास्ता चाहते हैं…

सत्या नडेला

माइक्रोसॉफ्ट के चेयरमैन और CEO हैं। AI की दौड़ में माइक्रोसॉफ्ट OpenAI के साथ बड़ी साझेदारी कर चुका है और अब अपने AI टूल्स पर भी तेजी से काम कर रहा है।

हालांकि, नडेला AI को बिना रोक-टोक आगे बढ़ाने के पक्ष में नहीं हैं। उनका कहना है कि इसका विकास सोच-समझकर और इंसानी निगरानी में होना चाहिए। उनका तर्क है कि ऐसी सुपरइंटेलिजेंस का कोई फायदा नहीं, जो इंसानों के कंट्रोल से बाहर हो या लोगों के काम न आए।

इसके साथ ही नडेला AI के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल और खुले AI सिस्टम को बढ़ावा देने के पक्ष में हैं।

'AI तेजी से आगे बढ़ रही है, लेकिन सही दिशा में। हम AI के उस दौर में जा रहे हैं, जहां मशीनें इंसानों के साथ मिलकर काम करेंगी।’ - सत्या नडेला

‘AI तेजी से आगे बढ़ रही है, लेकिन सही दिशा में। हम AI के उस दौर में जा रहे हैं, जहां मशीनें इंसानों के साथ मिलकर काम करेंगी।’ – सत्या नडेला

सुंदर पिचाई

अल्फाबेट और गूगल के CEO हैं। वह AI के खतरों को मानते हैं, लेकिन इसके लिए बहुत कड़े नियमों के पक्ष में नहीं हैं।

पिचाई का कहना है कि AI के इस्तेमाल के हिसाब से अलग-अलग नियम बनाए जाने चाहिए। उनके मुताबिक, AI के जोखिम से निपटना जरूरी है, लेकिन इसके फायदों से पीछे रह जाना भी बड़ा खतरा हो सकता है।

पिचाई सैन फ्रांसिस्को में ब्लूमबर्ग टेक कॉन्फ्रेंस के दौरान। तस्वीर जून 2025 की है।

पिचाई सैन फ्रांसिस्को में ब्लूमबर्ग टेक कॉन्फ्रेंस के दौरान। तस्वीर जून 2025 की है।

मार्क जुकरबर्ग

मेटा के चेयरमैन और CEO हैं। उनका मानना है कि AI अगर कुछ बड़ी कंपनियों तक सीमित रहा तो यह ज्यादा बड़ा खतरा हो सकता है। इसके बजाय वह AI को ज्यादा लोगों तक पहुंचाने को सुरक्षा का एक तरीका मानते हैं।

जुकरबर्ग ने चेतावनी दी है कि अमेरिका में AI मॉडल बनाने और जारी करने की रफ्तार धीमी हुई तो इसका फायदा चीन को मिल सकता है। हालांकि, वह AI की सुरक्षा को लेकर चिंताओं को भी मानते हैं।

इसी वजह से मेटा भविष्य में अपने सबसे शक्तिशाली AI मॉडल सभी के लिए खुले तौर पर जारी न करने का फैसला कर सकती है।

जकरबर्ग का कहना है कि रेगुलेटर्स को चीन में AI के डेवलपमेंट को लेकर ज्यादा चिंता करनी चाहिए।

जकरबर्ग का कहना है कि रेगुलेटर्स को चीन में AI के डेवलपमेंट को लेकर ज्यादा चिंता करनी चाहिए।

एलेक्जेंडर वेंग

2025 में मेटा से जुड़े और कंपनी में AI से जुड़े बड़े प्रोजेक्ट्स की जिम्मेदारी संभाली। वह मेटा के AI असिस्टेंट एजेंट ‘म्यूस’ के विकास से भी जुड़े हैं।

वेंग ने एक स्ट्रैटिजी पेपर में सुपरइंटेलिजेंस को परमाणु बम के बाद सबसे खतरनाक चीज बताया। उनका कहना है कि अमेरिका को AI को सिर्फ टेक्नोलॉजी के तौर पर नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और दूसरे देशों को रोकने की रणनीति के नजरिए से भी देखना चाहिए।

वेंग भी AI को सबसे खतरनाक हथियार बता चुके हैं।

वेंग भी AI को सबसे खतरनाक हथियार बता चुके हैं।

AI का विकास तेजी से जारी रखने के पक्ष में

जेनसन हुआंग

एनवीडिया के को-फाउंडर और CEO हैं। एनवीडिया के चिप्स का इस्तेमाल AI बनाने वाली ज्यादातर बड़ी कंपनियां करती हैं। हुआंग AI के तेज विकास के प्रमुख समर्थकों में हैं।

उनका कहना है कि कंपनियों को सरकार से AI पर ज्यादा नियम बनाने की मांग नहीं करनी चाहिए। AI से नौकरियां जाने और अमेरिकी चिप्स दूसरे देशों को बेचने जैसे मुद्दों पर उनका एंथ्रोपिक के CEO डारियो अमोडेई से सार्वजनिक मतभेद भी रहा है।

हुआंग ने कहा है कि बड़ी टेक कंपनियां AI पर जितना पैसा खर्च कर रही हैं, उसे लेकर निवेशकों को घबराने की जरूरत नहीं है।

हुआंग ने कहा है कि बड़ी टेक कंपनियां AI पर जितना पैसा खर्च कर रही हैं, उसे लेकर निवेशकों को घबराने की जरूरत नहीं है।

डेविड सैक्स

टेक निवेशक हैं। ट्रम्प प्रशासन में वह AI और क्रिप्टो से जुड़े मामलों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। वह AI के डर के आधार पर सख्त नियम बनाने के खिलाफ हैं।

सैक्स अमेरिकी राज्यों के अलग-अलग AI कानून बनाने का भी विरोध करते हैं। इसके बजाय वह कम सरकारी दखल वाली नीति चाहते हैं। उनका कहना है कि AI कंपनियां तेजी से नई तकनीक विकसित कर रही हैं, इसलिए उनकी रफ्तार रोकने की कोशिश नहीं होनी चाहिए।

डेविड सैक्स रिपब्लिकन नेशनल कन्वेंशन में बोलते हुए। तस्वीर दिसंबर 2025 की है।

डेविड सैक्स रिपब्लिकन नेशनल कन्वेंशन में बोलते हुए। तस्वीर दिसंबर 2025 की है।

अमेरिकी राजनीति में भी AI को लेकर दो राय

नियम बनाने के पक्ष में…

बर्नी सैंडर्स

निर्दलीय अमेरिकी सीनेटर हैं। AI के तेज विकास के आलोचक रहे हैं। उनका कहना है कि AI से बड़ी कंपनियों की ताकत बढ़ सकती है और इसका असर कामगारों पर पड़ सकता है।

सैंडर्स ने नए AI डेटा सेंटर बनाने पर रोक लगाने का प्रस्ताव दिया है। साथ ही, बड़ी AI कंपनियों पर 50% टैक्स लगाने और उससे सार्वजनिक फंड बनाने की बात कही है।

उन्होंने सुपरइंटेलिजेंस पर स्थायी रोक लगाने का भी प्रस्ताव रखा है। इसके अलावा, उनका प्रस्ताव है कि तब तक AI के एडवांस विकास पर रोक रहे, जब तक ऐसे सिस्टम को लेकर सुरक्षा इंतजाम तय नहीं हो जाते।

बर्नी सैंडर्स ने एक बार कहा था- ‘आने वाले समय में इंसान AI को कंट्रोल नहीं कर पाएगा। इसके बजाय AI इतना ताकतवर हो सकता है कि वह इंसानों को ही कंट्रोल करने लगेगा।’

बर्नी सैंडर्स ने एक बार कहा था- ‘आने वाले समय में इंसान AI को कंट्रोल नहीं कर पाएगा। इसके बजाय AI इतना ताकतवर हो सकता है कि वह इंसानों को ही कंट्रोल करने लगेगा।’

नियमों के विरोध में…

माइक जॉनसन

अमेरिकी स्पीकर मानते हैं कि AI के खतरे बढ़ रहे हैं, लेकिन वह जल्दबाजी में नियम बनाने के पक्ष में नहीं हैं। वे कहते हैं कि जल्दबाजी में ऐसे नियम नहीं बनाने चाहिए जिनसे चीन को फायदा मिल सकता है।

जॉनसन ने AI के कारण इंसानों के खत्म हो जाने की आशंकाओं को खारिज किया है।

अमेरिकी हाउस स्पीकर माइक जॉनसन 15 सितंबर को कैपिटल हिल क्लब में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान।

अमेरिकी हाउस स्पीकर माइक जॉनसन 15 सितंबर को कैपिटल हिल क्लब में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान।

डोनाल्ड ट्रम्प

चाहते हैं कि AI के मामले में अमेरिका चीन से आगे रहे। उन्होंने AI में अमेरिका की बढ़त बनाए रखना अपनी प्राथमिकता बनाई है।

इसके लिए वह AI को तेजी से आगे बढ़ाने के पक्ष में हैं। इसमें AI डेटा सेंटर के लिए ज्यादा बिजली की व्यवस्था करना और ऐसे AI मॉडल को बढ़ावा देना शामिल है, जिनका इस्तेमाल ज्यादा लोग कर सकें।

एनवीडिया के CEO जेनसन हुआंग के साथ एक कॉन्फ्रेंस में ट्रम्प ने यह भी कहा था कि AI के विकास में सरकार को ज्यादा दखल नहीं देना चाहिए।

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