
आज के प्रमुख करेंट अफेयर्स, जो सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स के लिए जरूरी हैं-
नेशनल (NATIONAL)
1. टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने इस्तीफा दिया
- 12 अगस्त को टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने अपने पद से इस्तीफा दिया।
- चंद्रशेखरन 2017 में टाटा संस के चेयरमैन बने थे। वे टाटा परिवार से बाहर के पहले ऐसे मैनेजर थे, जिन्होंने इस समूह की कमान संभाली।
- ये फैसला 18 अगस्त को होने वाली टाटा संस की एजीएम से ठीक पहले आया है। हालांकि, वे फरवरी 2027 यानी अपना कार्यकाल खत्म होने तक इस पद पर बने रहेंगे।
- चंद्रशेखरन 2016 में टाटा संस बोर्ड में डायरेक्टर अपॉइंट हुए थे।
- जनवरी 2017 में चंद्रशेखरन टाटा संस के बोर्ड में एग्जीक्यूटिव चेयरमैन अपॉइंट हुए और बाद में चेयरमैन बने।

2. टाटा ग्रुप के वाइस चेयरमैन विजय सिंह ने पद से इस्तीफा दिया
12 अगस्त को टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के दो मुख्य ट्रस्टों में शामिल सर रतन टाटा ट्रस्ट यानी SRTT के वाइस चेयरमैन विजय सिंह ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
विजय सिंह का कार्यकाल 14 अगस्त को खत्म हो रहा था, उन्होंने उससे पहले ही अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।
हालांकि, वे टाटा ग्रुप के दूसरे मुख्य ट्रस्ट सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट यानी SDTT में ट्रस्टी के पद पर बने रहेंगे।
टाटा ट्रस्ट्स- SRTT और SDTT के पास टाटा संस की लगभग 66% हिस्सेदारी है।
विजय सिंह का ये फैसला टाटा ट्रस्ट्स के भीतर जारी अंदरूनी मतभेदों और रेगुलेटरी कार्यवाही के बीच आया है।
विजय 1970 बैच के मध्य प्रदेश कैडर के IAS हैं।विजय मध्य प्रदेश में जबलपुर व इंदौर संभाग के कमिश्नर और होम सेक्रेटरी जैसे पदों पर रहे।
विजय 2018 से 2026 तक सर रतन टाटा ट्रस्ट (SRTT) और सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (SDTT) और टाटा ट्रस्ट से जुड़े रहे।

3. FSSAI ने पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक को बैन किया
12 अगस्त को भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने पान मसाला की पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक को बैन कर दिया है।
नए नियमों के तहत कंपनियां अब सिर्फ पेपर, टिन या ग्लास कंटेनर में ही पान मसाला पैक करके बेच सकेंगी।
FSSAI ने फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड पैकेजिंग अमेंडमेंट रेगुलेशन 2026 को नोटिफाई कर दिया है। ये नए नियम तुरंत लागू हो गए हैं।
FSSAI के इस बैन की मुख्य वजह पर्यावरण सुरक्षा है।
दरअसल प्लास्टिक और एल्युमिनियम फॉयल वाले पाउच सालों तक नष्ट नहीं होते और प्रदूषण बढ़ाते हैं। इस नियम का मकसद पान मसाला की पैकेजिंग को पूरी तरह प्लास्टिक फ्री और इको-फ्रेंडली बनाना है।
ये फैसला पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के ‘प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स, 2016’ के प्रावधानों के तहत लिया गया है।






